उफान पर जलाली दरिया: बमियाल में पहली ही बारिश में बाढ़ जैसे हालात, धान की फसल तबाह
* 1 साल बाद भी अधूरा पड़ा पुल, पठानकोट से कटा संपर्क
* खेतों में पानी भरने से सोलर पंप और ट्यूबवेल डूबे, किसानों में चिंता
बमियाल: सीमावर्ती क्षेत्र बमियाल में मानसून की पहली ही तेज बारिश ने भारी तबाही मचाई है। क्षेत्र से गुजरने वाले जलाली दरिया का जलस्तर अचानक बढ़ने से नदी ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। उफान मारते पानी ने आसपास के दर्जनों एकड़ खेतों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे हाल ही में लगाई गई धान की फसल को भारी नुकसान पहुँचा है।
फसलों के साथ-साथ किसानों द्वारा खेतों में लगाए गए सोलर पंप, ट्यूबवेल और अन्य महँगे कृषि उपकरण जलमग्न हो गए हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला जारी रहा और पानी का स्तर बढ़ा, तो नुकसान का दायरा और अधिक भयावह हो सकता है।
अधूरे पुल ने बढ़ाई मुसीबत, यातायात पूरी तरह ठप
गौरतलब है कि पिछले साल भी जलाली दरिया ने बमियाल, मुठ्ठी और रमकालमा समेत कई सीमावर्ती गांवों में भारी तबाही मचाई थी। उस दौरान बमियाल को दीनानगर और पठानकोट से जोड़ने वाली सड़क पर बना मुख्य पुल क्षतिग्रस्त हो गया था।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि एक साल का समय बीत जाने के बावजूद प्रशासन इस पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं करवा सका। आज जैसे ही दरिया का जलस्तर बढ़ा, पानी निर्माणाधीन और वैकल्पिक रास्तों के ऊपर से बहने लगा। इसके चलते बमियाल से पठानकोट जाने वाला मुख्य मार्ग एक बार फिर बंद हो गया है।
इसके अलावा:
- मंगवाल मोड़ और रमकालमा के आसपास की सड़कों पर जलभराव से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
- वाहन चालकों और ग्रामीणों को आवाजाही के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है।
प्रशासनिक लापरवाही पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
“हर साल बरसात के मौसम में जलाली दरिया हमारे लिए मुसीबत बनकर आता है। अगर पिछले साल हुए नुकसान के बाद प्रशासन समय रहते पुल का निर्माण कार्य पूरा कर देता, तो आज दोबारा यह नौबत न आती। हमारी फसलें और उपकरण हर साल बर्बाद हो रहे हैं, लेकिन कोई पक्का समाधान नहीं निकाला जा रहा।” > — स्थानीय निवासी
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित फसलों का तुरंत सर्वेक्षण करवाकर मुआवजा दिया जाए और बंद पड़े पुल का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर पूरा करवाया जाए ताकि सीमावर्ती इलाके का संपर्क जिला मुख्यालय से न कटे।










