प्रदेश में कामकाजी महिलाओं को बड़ी सौगात: खुलेंगे 152 नए क्रैच, वर्कर और हेल्परों की होगी सीधी भर्ती

शिमला: प्रदेश सरकार कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। महिला एवं बाल विकास विभाग राज्य में 152 नए क्रैच (बाल देखभाल केंद्र) खोलने जा रहा है। इन केंद्रों के संचालन से जहां एक ओर कामकाजी महिलाओं के बच्चों को सुरक्षित माहौल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। विभाग ने इन क्रैचों में वर्कर और हेल्पर की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है।

एसडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी चयन
इन पदों पर नियुक्तियां पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था के तहत की जाएंगी। सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, एसडीएम (SDM) की अध्यक्षता में गठित एक विशेष कमेटी इन भर्तियों को अंतिम रूप देगी। विभाग का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया पूरी कर क्रैचों का संचालन शुरू किया जाए।

अनुभवी पुराने कर्मचारियों को राहत, अपात्रों की होगी छुट्टी
सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पुराने क्रैचों में कार्यरत कर्मचारियों को राहत दी है। विभाग के अनुसार:
- पात्र कर्मचारियों की निरंतरता: जो पुराने कर्मचारी निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं, उनकी सेवाएं बरकरार रखी जाएंगी। सरकार उनके अनुभव का लाभ बच्चों की देखभाल में लेना चाहती है।
- नए पदों पर भर्ती: जो कर्मचारी पात्रता पूरी नहीं करेंगे, उन्हें पद से हटाया जाएगा और उनके स्थान पर नई नियुक्तियां की जाएंगी।
वेतन और शैक्षणिक योग्यता
भर्ती के लिए विभाग ने मानक तय कर दिए हैं, जो इस प्रकार हैं:
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पद का नाम |
शैक्षणिक योग्यता |
मासिक मानदेय |
|---|---|---|
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वर्कर (Worker) |
12वीं पास |
₹ 6,500 |
|
हेल्पर (Helper) |
10वीं पास |
₹ 3,500 |
“विभाग प्रदेश में 152 नए क्रैच खोलने जा रहा है। इसके लिए वर्कर और हेल्पर की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। इससे बाल देखभाल सुविधाओं का विस्तार होगा और महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिलेगी।” > — डॉ. पंकज ललित, निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग

महिला सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम
इन नए क्रैचों के खुलने से प्रदेश की उन महिलाओं को सबसे ज्यादा लाभ होगा जो सरकारी या निजी क्षेत्रों में कार्यरत हैं। छोटे बच्चों की देखभाल की उचित व्यवस्था होने से वे बिना किसी मानसिक तनाव के अपने काम पर ध्यान दे सकेंगी। यह पहल न केवल बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।








