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स्मार्टफोन की तरह ‘रीसेट’ होता है आपका दिमाग; जानें क्या है ‘डोरवे इफेक्ट’ और क्यों होती है ये भूल?

भूलने की बीमारी नहीं, यह है ‘डोरवे इफेक्ट’: जानें क्यों कमरे में घुसते ही आप भूल जाते हैं अपना काम

  • ​एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते ही याददाश्त का ‘रीसेट’ होना सामान्य वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
  • ​मस्तिष्क नए कमरे को एक ‘इवेंट बाउंड्री’ (Event Boundary) की तरह देखता है।
  • ​तनाव और मल्टीटास्किंग इस स्थिति को और बढ़ा देते हैं।

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है?

​अक्सर आप किचन में पानी पीने या बेडरूम में चार्जर लेने जाते हैं, लेकिन दरवाजे पर कदम रखते ही ठिठक जाते हैं— आखिर मैं यहाँ क्या करने आया था? अगर हाँ, तो घबराइए नहीं। यह याददाश्त की कोई गंभीर बीमारी नहीं, बल्कि विज्ञान की एक सामान्य प्रक्रिया है जिसे मनोवैज्ञानिक ‘डोरवे इफेक्ट’ (Doorway Effect) कहते हैं।

क्यों ‘रीसेट’ हो जाता है हमारा दिमाग?

​मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जब हम एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते हैं (यानी किसी दरवाजे को पार करते हैं), तो हमारा दिमाग उसे एक ‘इवेंट बाउंड्री’ की तरह देखता है।

​जैसे ही हम नए माहौल में कदम रखते हैं, हमारा मस्तिष्क पिछले कमरे की जानकारी को ‘पुराना’ मानकर आर्काइव कर देता है और नए वातावरण के हिसाब से खुद को अपडेट करने लगता है। इसे ऐसे समझें जैसे स्मार्टफोन को तेज चलाने के लिए हम बैकग्राउंड ऐप्स बंद कर देते हैं, वैसे ही दिमाग नई जगह पहुँचते ही पिछली फाइलों को ‘फ्लश’ कर देता है।

इन स्थितियों में बढ़ जाती है यह समस्या

​यद्यपि यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में यह अधिक परेशान कर सकती है:

  1. मानसिक थकान: दिनभर की थकान के बाद दिमाग का फोकस कम हो जाता है।
  2. मल्टीटास्किंग: अगर आप फोन पर बात करते हुए या गहरी चिंता में डूबे हुए दूसरे कमरे में जाते हैं, तो दिमाग ‘कन्फ्यूज’ हो जाता है।
  3. तनाव और दबाव: स्ट्रेस के दौरान दिमाग एक साथ कई फाइलों पर काम कर रहा होता है, जिससे छोटी बातें फिसल जाती हैं।
  4. रुचि की कमी: जिन कामों में हमारी दिलचस्पी कम होती है, उन्हें हम अक्सर जल्दी भूल जाते हैं।

भूलने की इस आदत से कैसे बचें? अपनाएं ये 4 टिप्स

​अगर आप बार-बार भूलने से परेशान हैं, तो विशेषज्ञ ये तरीके अपनाने की सलाह देते हैं:

    • विजुअलाइजेशन: जो चीज लेने जा रहे हैं, उसकी तस्वीर अपने मन में साफ रखें।
    • बोलकर याद रखें: कमरे बदलते समय मन में दोहराते रहें, जैसे- “मुझे चार्जर लेना है…”
    • एक सेकंड का पॉज: दूसरे कमरे में घुसने से ठीक पहले एक सेकंड के लिए रुकें और अपने उद्देश्य को याद करें।
    • संकेत (Cues) का प्रयोग: हाथ में कोई छोटी चीज रखें जो आपको उस काम की याद दिलाती रहे।

विशेषज्ञ की राय: कब लें डॉक्टर की सलाह?

कमरे में जाकर काम भूलना पूरी तरह सामान्य है। लेकिन, यदि आप लोगों के नाम, जरूरी मीटिंग्स या रोजमर्रा के बहुत महत्वपूर्ण काम बार-बार भूलने लगें, तो यह ‘डिमेंशिया’ या याददाश्त की किसी अन्य समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में न्यूरोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहता है।

Ami News
Author: Ami News

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