शिमला पहाड़ी: खुशनुमा यादों का पार्क अब बना गंदगी और असामाजिक तत्वों का अड्डा

पठानकोट: कभी अपनी खूबसूरती, रंग-बिरंगे फूलों और सुकून के पलों के लिए पूरे देश में मशहूर रहा पठानकोट का ‘शिमला पहाड़ी पार्क’ आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। स्थानीय प्रशासन की अनदेखी के चलते यह पार्क अब केवल गंदगी का ढेर बनकर रह गया है, बल्कि यहाँ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी आम बात हो गई है।
शहीदी स्मारक की अनदेखी
पार्क के भीतर बना ‘शहीदी स्मारक’ जो देश के वीरों की याद दिलाता है, आज खुद रख-रखाव की कमी से जूझ रहा है। पार्क के चारों तरफ गंदगी पसरी हुई है और पौधों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। शाम के समय जो लोग यहाँ सैर करने या बच्चों को खिलाने आते हैं, उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस बदहाली के कारण अब बच्चों में बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का डेरा
पार्क की दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण यहाँ सुरक्षा व्यवस्था का न होना है। स्थानीय बुजुर्गों और निवासियों के अनुसार, पार्क में दिन-रात नशेड़ियों और जुआरियों का जमावड़ा लगा रहता है। हद तो तब हो जाती है जब यहाँ स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राएं आकर अभद्र भाषा और अश्लील हरकतों का सहारा लेते हैं, जिससे परिवार के साथ आने वाले लोगों को भारी शर्मिंदगी उठानी पड़ती है।

मंदिर में चोरियों के बाद भी पुलिस प्रशासन मौन
पार्क परिसर में स्थित मंदिर को चोरों ने तीन से चार बार अपना निशाना बनाया है। हर चोरी के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा पुख्ता करने की गुहार लगाई। पुलिस द्वारा हर बार सुरक्षा के खोखले वादे तो किए गए, लेकिन धरातल पर आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
क्या कहते हैं स्थानीय निवासी?
एक स्थानीय बुजुर्ग ने भावुक होते हुए बताया:
”जब मैं छोटा था, तो इस पार्क का नाम पूरे हिंदुस्तान में नंबर वन पार्कों में लिया जाता था। बॉम्बे (मुंबई) से हमारे रिश्तेदार आते थे, तो इस पार्क की तारीफ करते थे। लेकिन आज यह पार्क सिर्फ गंदगी का अड्डा बन चुका है। पाँच-सात माली इस पार्क की देखभाल करते थे, लेकिन आज नगर निगम (कार्पोरेशन) सो रहा है। यहाँ की दुर्दशा देखकर दिल दुखता है।”

प्रशासन से जनता की अपील
पठानकोट की जनता अब इस ऐतिहासिक पार्क को इस तरह लावारिस छोड़ देने के मूड में नहीं है। लोगों की मांग है कि नगर निगम तुरंत यहाँ सफाई व्यवस्था दुरुस्त करे और पुलिस प्रशासन यहाँ स्थायी पीसीआर या गार्ड तैनात करे, ताकि असामाजिक तत्वों पर नकेल कसी जा सके और शिमला पहाड़ी को उसका पुराना गौरव वापस मिल सके।







