हिमाचल में अब रिटायरमेंट के बाद ‘नो एंट्री’: सुक्खू सरकार ने सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्ति पर लगाई पूर्ण रोक

शिमला: हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने सरकारी महकमों में रिटायरमेंट के बाद मलाईदार पदों पर जमे रहने की परंपरा को जड़ से खत्म कर दिया है। चौतरफा आलोचनाओं और युवाओं के बढ़ते दबाव के बीच, सरकार ने सरकारी विभागों में मिलने वाले सेवा विस्तार (Extension) और पुनर्नियुक्ति (Re-employment) पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। मंगलवार को कार्मिक विभाग ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
विभागों को सख्त हिदायत: ‘न भेजें कोई प्रस्ताव’
सरकार द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब कोई भी प्रशासनिक विभाग रिटायर हो रहे अधिकारियों या कर्मचारियों के सेवा विस्तार का प्रस्ताव सरकार को नहीं भेजेगा। मुख्य सचिव के माध्यम से जारी इन आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में ऐसे किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। यदि कोई विभाग ऐसा करता है, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को राहत, पर नई भर्ती का रास्ता साफ
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो अधिकारी या कर्मचारी वर्तमान में सेवा विस्तार या पुनर्नियुक्ति पर काम कर रहे हैं, उन पर यह तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा।
- कार्यकाल पूरा करेंगे: वर्तमान में तैनात कर्मचारी अपनी तय अवधि (Tenure) पूरी होने तक पद पर बने रहेंगे।
- तय समय पर विदाई: जैसे ही उनका वर्तमान कार्यकाल समाप्त होगा, उन्हें तुरंत कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। उन्हें दोबारा सेवा विस्तार नहीं मिलेगा।

विवादों और आलोचनाओं के बाद बैकफुट पर सरकार
हिमाचल प्रदेश में पिछले काफी समय से रिटायर्ड अफसरों को बार-बार सेवा विस्तार देने पर सुक्खू सरकार विपक्ष के निशाने पर थी। हाल ही में हुए कुछ विवादों ने आग में घी डालने का काम किया था:
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- मंत्री की बेटी का मामला: हाल ही में एक कैबिनेट मंत्री की बेटी को शिक्षक के पद पर सेवा विस्तार देने और फिर उन्हें प्रमोट कर प्रिंसिपल बनाए जाने पर बड़ा सियासी बवाल हुआ था।
- बेरोजगारों का आक्रोश: प्रदेश के हजारों बेरोजगार युवा लंबे समय से मांग कर रहे थे कि सेवा विस्तार के कारण नई भर्तियों के रास्ते बंद हो रहे हैं।
- विपक्ष का हमला: भाजपा लगातार सरकार पर ‘चहेतों को उपकृत’ करने का आरोप लगा रही थी।
“सरकार का यह निर्णय राज्य के युवाओं के हित में है। इससे पद खाली होंगे और नई भर्तियों में तेजी आएगी। प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए यह कड़ा कदम उठाया गया है।” > (सरकारी सूत्रों के अनुसार)

महत्वपूर्ण बिंदु: एक नजर में
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विषय |
स्थिति |
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नया आदेश |
सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्ति पर पूर्ण प्रतिबंध। |
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नया प्रस्ताव |
प्रशासनिक विभाग अब कोई फाइल आगे नहीं भेजेंगे। |
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वर्तमान कर्मचारी |
कार्यकाल खत्म होने तक पद पर रहेंगे, फिर छुट्टी। |
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कारण |
विपक्ष का दबाव, अपनों को उपकृत करने के आरोप और बेरोजगारी। |

संपादकीय टिप्पणी: सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा, बल्कि पदोन्नति की राह देख रहे मौजूदा कर्मचारियों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को भी नए अवसर मिलेंगे।








