बरसी से ठीक पहले फिर कांपी कांगड़ा की धरती: 121 साल पुराने उस जख्म की ताजा हुई यादें

धर्मशाला/कांगड़ा : कांगड़ा जिले में एक बार फिर भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए हैं। हालांकि इन झटकों की तीव्रता कम थी और कहीं से भी जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है, लेकिन समय के एक ‘अजीब संयोग’ ने जिले के लोगों को दहशत में डाल दिया है। यह भूकंप ठीक उस समय आया जब जिला अपनी सबसे बड़ी ऐतिहासिक त्रासदी की 121वीं बरसी मनाने की तैयारी कर रहा था।
त्रासदी की बरसी से 8 घंटे पहले आए झटके
हैरानी की बात यह है कि 3 अप्रैल 2026 को आए ये झटके, 4 अप्रैल 1905 की उस भीषण तबाही की बरसी से महज 8 घंटे 34 मिनट पहले महसूस किए गए। 121 साल पहले आज ही के दिन (4 अप्रैल) सुबह 6 बजकर 19 मिनट पर आए 7.8 तीव्रता के भूकंप ने पूरे कांगड़ा को मलबे के ढेर में बदल दिया था, जिसमें करीब 20 हजार लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। कल रात आए झटकों ने एक बार फिर इतिहास की उस डरावनी पुनरावृत्ति का अहसास करा दिया है।
चिंता का विषय: कुछ ही दिनों में दूसरी बार हिली धरती
स्थानीय निवासियों के लिए चिंता की बात यह है कि पिछले कुछ दिनों के भीतर कांगड़ा क्षेत्र में यह दूसरी बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। भले ही इस बार तीव्रता कम रही, लेकिन बार-बार आती ये हलचलें किसी बड़े खतरे का संकेत तो नहीं, यह सवाल हर किसी के मन में है।

विशेषज्ञों की राय: सिस्मिक जोन-5 में है कांगड़ा
भूगर्भीय विशेषज्ञों के अनुसार, कांगड़ा जिला भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील (सिस्मिक जोन-5) में आता है।
- सक्रिय जोन: हिमाचल का अधिकांश हिस्सा उच्च भूकंपीय क्षेत्रों में स्थित है।
- पूर्वानुमान असंभव: विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि भूकंप का सटीक समय और तीव्रता पहले से बताना संभव नहीं है।
- सावधानी ही बचाव: आपदा प्रबंधन के दिशा-निर्देशों का पालन करना और निर्माण कार्यों में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल करना ही एकमात्र सुरक्षा है।

प्रशासन की पैनी नजर, घबराने की जरूरत नहीं
प्रशासनिक अधिकारियों ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है। जिला प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। अधिकारियों का कहना है कि:
- आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट मोड पर हैं।
- किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संसाधन तैयार रखे गए हैं
निष्कर्ष:
कांगड़ा की धरती का बार-बार कांपना इस बात का प्रमाण है कि नीचे भूगर्भीय हलचलें सक्रिय हैं। 1905 की यादें हमें डराने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति सजग और तैयार रहने के लिए प्रेरित करनी चाहिए।








