नूरपुर के 5 वर्षीय श्रेयन ने रचा इतिहास: बने ट्राइसिटी और हिमाचल के सबसे कम उम्र के FIDE रेटेड चेस प्लेयर


नन्हे मास्टर का बड़ा धमाका: महज 5 साल 6 महीने की उम्र में हासिल की इंटरनेशनल रेटिंग, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से सीखी शतरंज की बारीकियां।

नूरपुर:( ऋषि महाजन) हिमाचल प्रदेश के एक नन्हे सितारे ने शतरंज की बिसात पर ऐसी चालें चलीं कि पूरी दुनिया देखती रह गई। नूरपुर के मूल निवासी और वर्तमान में चंडीगढ़ के दिल्ली पब्लिक स्कूल (सेक्टर-40) में प्रेप-II के छात्र श्रेयन शर्मा ने महज 5 साल की उम्र में FIDE (विश्व शतरंज महासंघ) रेटिंग हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वे अब ट्राइसिटी (चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली) और हिमाचल प्रदेश के सबसे कम उम्र के रेटेड खिलाड़ी बन गए हैं।

लॉकडाउन की उपज नहीं, जुनून का नतीजा
सितंबर 2020 में जन्मे श्रेयन ने मात्र 4 साल 8 महीने की उम्र में शतरंज के मोहरों से दोस्ती की। उन्होंने किसी महंगे कोच से नहीं, बल्कि Chess.com और Lichess जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर प्रैक्टिस कर अपनी नींव मजबूत की। अक्टूबर 2025 से उन्होंने पेशेवर प्रतियोगिताओं में कदम रखा और पीछे मुड़कर नहीं देखा।

बड़ों को दी मात, कांगड़ा से दिल्ली तक बजाया डंका
श्रेयन की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अंडर-9 वर्ग में खुद से दोगुने उम्र के खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने कांगड़ा, देहरादून और नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रेटिंग टूर्नामेंट्स में शानदार प्रदर्शन कर यह मुकाम हासिल किया। फिलहाल वे चंडीगढ़ चेस अकादमी में प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेकर अपनी स्किल्स को और तराश रहे हैं।

परिवार बना ताकत: पिता एसडीएम, मां और बहन का मिला साथ
श्रेयन की सफलता के पीछे उनके परिवार का अटूट सहयोग है। उनके पिता विश्रुत भारती (एसडीएम, फतेहपुर) और माता दीपिका जिंदल ने श्रेयन की रुचि को पहचाना और उसे सही दिशा दी। खास बात यह है कि श्रेयन की बहन भी शतरंज खिलाड़ी हैं, जिससे घर में ही खेल और अभ्यास का बेहतरीन माहौल बना रहता है।

प्रमुख उपलब्धियां: एक नजर में
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- सबसे कम उम्र: मात्र 5 साल 6 महीने की आयु में अंतरराष्ट्रीय रेटिंग हासिल की।
- क्षेत्रीय गौरव: ट्राइसिटी और हिमाचल के सबसे कम उम्र के रेटेड प्लेयर।
- कठिन प्रतिस्पर्धा: अंडर-9 कैटेगरी में बड़े खिलाड़ियों को हराकर बटोरीं सुर्खियां।
- डिजिटल लर्निंग: शुरुआती शिक्षा पूरी तरह ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त की।
“श्रेयन की यह उपलब्धि न केवल हिमाचल बल्कि पूरे देश के बच्चों के लिए प्रेरणा है। यह साबित करता है कि अगर अनुशासन और जुनून हो, तो उम्र महज एक नंबर है।”
— एक स्थानीय खेल विशेषज्ञ








