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​”ठियोग कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 75 की उम्र में दो बुजुर्ग जोड़ों का तलाक, पेंशन और सम्मान के साथ हुए जुदा”

ठियोग कोर्ट का बड़ा फैसला: 75 की उम्र में ‘आजाद’ हुए दो जोड़े, पेंशन और सम्मान के साथ हुआ ‘सम्मानजनक’ तलाक

ठियोग (शिमला) : हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के ठियोग उपमंडल से वैवाहिक रिश्तों के अंत का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानूनी और सामाजिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। यहां की एक अदालत ने दो अलग-अलग मामलों में आपसी सहमति के आधार पर तलाक को मंजूरी दी है। चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों मामलों में पत्नियों की उम्र 75 वर्ष है। जीवन के इस अंतिम पड़ाव पर कानूनी रूप से अलग होने के फैसले ने हर किसी को हैरान कर दिया है।

केस 1: 34 साल पुराना रिश्ता टूटा, पेंशन से होगा गुजारा

​पहला मामला वर्ष 1990 में हुए एक विवाह का है। पिछले 15 वर्षों (2010) से यह दंपत्ति अनबन के कारण अलग रह रहा था। दोनों की कोई संतान नहीं है। कई दौर की सुलह की कोशिशें नाकाम रहने के बाद, आखिरकार उन्होंने कानून का दरवाजा खटखटाया।

  • अदालत का मानवीय रुख: अदालत ने महिला के भविष्य को सुरक्षित करते हुए आदेश दिया कि पति अपनी मासिक पेंशन में से 5,000 रुपये हर महीने पूर्व पत्नी को भरण-पोषण के लिए देगा।
  • इलाज की जिम्मेदारी: वृद्धावस्था को देखते हुए यह तय किया गया कि पत्नी के बीमार होने पर इलाज का सारा खर्च पति ही उठाएगा।

केस 2: 75 साल की पत्नी और 39 साल का पति; बच्चे पिता के पास रहेंगे

​दूसरा मामला और भी हैरान करने वाला था, जिसमें 75 वर्षीय पत्नी और 39 वर्षीय पति ने 2008 में हुए अपने विवाह को समाप्त करने का फैसला किया। जून 2021 से दोनों के बीच गंभीर मतभेद चल रहे थे।

  • बच्चों का भविष्य: इस दंपत्ति के तीन बच्चे हैं। आपसी समझौते के तहत तीनों बच्चे अपने पिता के साथ रहेंगे। हालांकि, अदालत ने मां के ‘मिलने के अधिकार’ (Visitation Rights) को सुरक्षित रखा है; वह जब चाहें अपने बच्चों से मिल सकेंगी।

शर्तें: एक ही घर में अलग आशियाना

​अदालत ने इन दोनों मामलों में महिलाओं के सम्मान और बुनियादी सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा है। समझौते के अनुसार:

    1. ​पतियों को अपनी तलाकशुदा पत्नियों के रहने के लिए अलग कमरा, स्वतंत्र रसोई और वॉशरूम की सुविधा देनी होगी।
    2. ​यह सुनिश्चित करना होगा कि वे समाज में गरिमा के साथ रह सकें।

विशेषज्ञ की राय:

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला ‘म्यूचुअल कंसेंट’ (Mutual Consent) के साथ-साथ ‘मानवीय दृष्टिकोण’ का अनूठा उदाहरण है। यह दर्शाता है कि अब शांतिपूर्ण जीवन के लिए लोग लोक-लाज के बजाय अपने मानसिक सुकून को अधिक महत्व दे रहे हैं।

विवरण

केस – 1

केस – 2

शादी का साल

1990

2008

विवाद की अवधि

15 साल से अलग

जून 2021 से अनबन

पत्नी की उम्र

75 वर्ष

75 वर्ष

बच्चों की स्थिति

कोई संतान नहीं

3 बच्चे (पिता के पास रहेंगे)

मेंटेनेंस

₹5000 मासिक पेंशन + इलाज खर्च

आवास और बच्चों से मिलने का हक

Ami News
Author: Ami News

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