चैत्र नवरात्रि महानवमी: सिद्धियों की दात्री माँ सिद्धिदात्री की पूजा आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र

चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व अपने अंतिम चरण में है। आज नवरात्रि की नवमी तिथि है, जिसे ‘महानवमी’ के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन माँ दुर्गा के नौवें स्वरूप, माता सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, माँ का यह स्वरूप भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियाँ और मोक्ष प्रदान करने वाला है।
कौन हैं माँ सिद्धिदात्री? (स्वरूप और महत्व)
पुराणों के अनुसार, माँ सिद्धिदात्री कमल के पुष्प पर विराजमान हैं और सिंह (शेर) इनका वाहन है। देवी की चार भुजाएं हैं, जिनमें उन्होंने गदा, चक्र, शंख और कमल का पुष्प धारण किया हुआ है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने भी समस्त सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए माँ सिद्धिदात्री की ही तपस्या की थी। इन्हीं की कृपा से शिव का आधा शरीर देवी का हुआ और वे संसार में ‘अर्धनारीश्वर’ के नाम से प्रसिद्ध हुए। माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से न केवल लोक में सुख-समृद्धि मिलती है, बल्कि परलोक में भी सद्गति प्राप्त होती है।
पूजन विधि और कन्या पूजन
नवमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। माता की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं और उन्हें कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें।
- विशेष भोग: माँ सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी और काले चने का भोग अति प्रिय है।
- कन्या पूजन: नवमी के दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं के पूजन का विधान है। कन्याओं को साक्षात देवी का रूप मानकर उनके पैर धोए जाते हैं, उन्हें भोजन कराया जाता है और दक्षिणा देकर विदा किया जाता है। इससे माता रानी अत्यंत प्रसन्न होती हैं।
दिव्य मंत्र और सही उच्चारण
माँ सिद्धिदात्री की कृपा पाने के लिए इन मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना गया है:
1. मुख्य पूजा मंत्र:
सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
(उच्चारण: सिद्ध गन्धर्व यक्ष-आद्यैः असुरैः अमरैः अपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धि-दायिनी॥)

2. स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
(उच्चारण: या देवी सर्व-भूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥)
राम नवमी का अद्भुत संयोग
चैत्र नवरात्रि की नवमी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्मोत्सव यानी ‘राम नवमी’ भी मनाई जाती है। शक्ति की उपासना के साथ राम नाम का संकीर्तन आज के दिन को और भी दिव्य बनाता है।

निष्कर्ष
माँ सिद्धिदात्री का आशीर्वाद हर उस साधक को मिलता है जो सच्चे मन से उनकी शरण में जाता है। आज के दिन भक्त अपनी साधना पूर्ण करते हैं और माँ से यह प्रार्थना करते हैं कि उनके जीवन का अंधकार दूर हो और उन्हें ज्ञान व सिद्धि की प्राप्ति हो।
जय माता दी!








