हिमाचल: अब मनरेगा में 20 दिन काम करने वाले परिवार भी बन सकेंगे BPL पात्र

शिमला/परागपुर: हिमाचल प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने बीपीएल (BPL) परिवारों के चयन मानदंडों में बड़ा फेरबदल करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। अब राज्य में बीपीएल श्रेणी में शामिल होने के लिए उन परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान मनरेगा के तहत कम से कम 20 दिन का कार्य पूरा किया हो। सरकार का तर्क है कि इस ‘कार्य-आधारित मानक’ से चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनेगी।

चौथी बार नियमों में संशोधन, 100 से घटकर 20 दिन हुई शर्त
गौर करने वाली बात यह है कि सरकार ने मनरेगा कामगारों के लिए पात्रता शर्तों में यह चौथी बार संशोधन किया है। पहले बीपीएल पात्रता के लिए 100 दिन का कार्य अनिवार्य था, जिसे बाद में घटाकर क्रमशः 80 और 50 दिन किया गया था। अब छठे चरण में इसे मात्र 20 दिन कर दिया गया है। खंड विकास अधिकारी (BDO) परागपुर, अशोक कुमार ने बताया कि इस ढील से उन गरीब परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा, जो कार्य दिवसों की अधिक संख्या के कारण पहले सूची से बाहर हो जाते थे।
महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन प्रक्रिया
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अमरजीत सिंह द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, प्रथम से पांचवें चरण तक के सभी लंबित आवेदनों पर अब इसी संशोधित नियम के तहत विचार किया जाएगा।
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- आवेदन की अंतिम तिथि: 31 मार्च, 2026
- अंतिम सूची का प्रकाशन: 4 अप्रैल, 2026 (पंचायत-वार छंटनी के बाद)
”बीपीएल चयन के पुराने दिशानिर्देशों को अब इस नए ‘कार्य-आधारित मानक’ से प्रतिस्थापित कर दिया गया है। हमारा उद्देश्य वास्तविक पात्रों को लाभ पहुंचाना है।”
— अमरजीत सिंह, सचिव (ग्रामीण विकास)

पंचायत सचिवों को फील्ड पर उतरने के निर्देश
नए आदेशों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए प्रशासन सख्त हो गया है। परागपुर ब्लॉक के समस्त पंचायत सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) या ग्राम सभा की विशेष बैठकों के जरिए ग्रामीणों को इस बदलाव की जानकारी दें। प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी पात्र परिवार जानकारी के अभाव में आवेदन से वंचित न रहे।








