कन्या पूजन की धूम: घर-घर गूंजी नन्हीं कन्याओं की किलकारी, हलवा-पूरी के भोग के साथ भक्तों ने लिया आशीर्वाद

1. आठवें नवरात्र की देवी: माँ महागौरी
माँ महागौरी का रंग पूर्णतः गोरा है, इसलिए इन्हें महागौरी कहा जाता है। इनके वस्त्र और आभूषण भी श्वेत (सफेद) होते हैं। इनकी चार भुजाएं हैं और इनका वाहन वृषभ (बैल) है। मान्यता है कि कठोर तपस्या के बाद जब शिव जी ने इनके शरीर पर गंगा जल डाला था, तब इनका शरीर अत्यंत कांतिमय और गौर हो गया था।
2. पूजा विधि (Puja Vidhi)
- स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी स्नान करके साफ वस्त्र (संभव हो तो सफेद या गुलाबी) पहनें।
- स्थापना: माँ की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं।
- भोग: महागौरी को नारियल का भोग बहुत प्रिय है। इसके अलावा हलवा-पूरी और चने का नैवेद्य भी अर्पित किया जाता है।
- धूप-दीप: माता को अक्षत, पुष्प (खासकर सफेद फूल या मोगरा), सिंदूर और गंध अर्पित करें।

3. अष्टमी के दिन लोग क्या-क्या करते हैं?
अष्टमी का दिन उत्सव और उद्यापन का होता है। इस दिन मुख्य रूप से ये कार्य किए जाते हैं:
- कन्या पूजन (Kanya Pujan): यह इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को माता का स्वरूप मानकर घर बुलाया जाता है। उनके पैर धोकर, उन्हें तिलक लगाया जाता है और हलवा, पूरी तथा काले चने का प्रसाद खिलाया जाता है। अंत में उन्हें उपहार या दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।
- कुल देवी पूजन: कई परिवारों में अष्टमी के दिन अपनी कुल देवी की विशेष पूजा और कड़ाही (प्रसाद) चढ़ाने की परंपरा होती है।
- संधि पूजा: जो लोग अष्टमी और नवमी के मिलन के समय पूजा करते हैं, वे इसे बहुत शुभ मानते हैं।
4. माँ महागौरी का मंत्र (Mantra)
पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

सरल मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
5. माता रानी की आरती और विधि
आरती करते समय एक थाली में कपूर या घी का दीपक जलाएं। साथ में घंटी और शंख की ध्वनि करना शुभ होता है। पूरे परिवार के साथ मिलकर प्रेमपूर्वक आरती गाएं:
आरती संग्रह (मुख्य अंश):
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दो नैना, चंद्रवदन नीको॥
…केसरी वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुःख हारी॥
आरती के बाद थाली के चारों ओर जल घुमाकर आचमन करें और फिर सभी सदस्यों को आरती दें।








