मिडिल ईस्ट संकट की आंच पंजाब के स्कूलों तक: LPG की किल्लत, चूल्हे पर पक रहा मिड-डे मील

अमृतसर/पंजाब: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और बिगड़ते हालातों का असर अब पंजाब के सरकारी स्कूलों की रसोई तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण राज्य में LPG गैस की भारी कमी देखी जा रही है। इसका सीधा असर स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील पर पड़ा है, जहाँ अब गैस सिलेंडर की अनुपलब्धता के चलते पारंपरिक लकड़ी के चूल्हों पर बच्चों का खाना तैयार किया जा रहा है।
इब्बण कलां स्कूल: चार दिनों से लकड़ी के चूल्हे का सहारा
अमृतसर के सरकारी हाई स्कूल इब्बण कलां से जमीनी हकीकत सामने आई है। यहाँ पिछले चार दिनों से गैस चूल्हे ठंडे पड़े हैं। स्कूल की प्रिंसिपल सिम्मी बेरी ने बताया कि गैस की सप्लाई न होने के कारण मजबूरी में लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि रोजाना करीब 10 से 15 किलो लकड़ी का इस्तेमाल कर मिड-डे मील तैयार किया जा रहा है, ताकि बच्चों को भूखा न रहना पड़े।

शिक्षा विभाग के सख्त निर्देश: ‘भोजन में न आए बाधा’
हालात को भांपते हुए पंजाब शिक्षा विभाग ने पहले ही सभी स्कूलों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी थी। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:
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- किसी भी परिस्थिति में बच्चों के भोजन की गुणवत्ता और समय के साथ समझौता नहीं होगा।
- यदि LPG सिलेंडर उपलब्ध नहीं है, तो स्कूल वैकल्पिक माध्यमों जैसे लकड़ी, बिजली (इंडक्शन) या अन्य ईंधन का प्रबंध करें।
- प्रशासनिक स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि सप्लाई चेन में आ रही रुकावट का असर बच्चों की सेहत और शिक्षा पर न पड़े।
”हम पूरी जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं। चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन हमारी प्राथमिकता यही है कि बच्चों को समय पर गर्म और पौष्टिक खाना मिले।”
— हरजिंदर कौर, मिड-डे मील वर्कर

सप्लाई चेन पर क्यों पड़ा असर?
जानकारों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तनावपूर्ण स्थिति की वजह से कच्चे तेल और गैस के आयात-निर्यात पर बुरा असर पड़ा है। भारत अपनी जरूरत की LPG का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आयात करता है। वैश्विक बाधाओं के कारण स्थानीय वितरकों तक समय पर स्टॉक नहीं पहुँच पा रहा है, जिसका खामियाजा अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के सरकारी संस्थानों को उठाना पड़ रहा है।








