प्रताप नगर चोरी कांड में नया मोड़: बरामद चांदी को ज्वैलर ने बताया ‘नकली’, अब पुलिस की रडार पर खुद पीड़ित

लुधियाना/महानगर:महानगर के प्रताप नगर स्थित ‘पारस ज्वेलर्स’ में हुई लाखों की चोरी का मामला अब सुलझने के बजाय और उलझता नजर आ रहा है। पुलिस द्वारा बरामद की गई चांदी को लेकर खड़े हुए विवाद ने जांच की दिशा ही बदल दी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या चोरी हुई चांदी वास्तव में असली थी या फिर यह किसी बड़े खेल का हिस्सा है।
क्या है पूरा विवाद?
पुलिस ने मामले में तत्परता दिखाते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि चोरी की गई चांदी को अहमदगढ़ भेजा गया था, जहां उसे पिघलाकर ईंटों (Raw Form) में तब्दील कर दिया गया। लेकिन जब पुलिस ने यह बरामद चांदी शोरूम मालिक गुरमीत सिंह को दिखाई, तो उन्होंने उसे पहचानने और लेने से साफ इनकार कर दिया। गुरमीत सिंह का दावा है कि बरामद की गई चांदी नकली है।

पुराने रिकॉर्ड ने बढ़ाई ज्वैलर की मुश्किलें
ज्वैलर द्वारा चांदी को नकली बताए जाने के बाद पुलिस ने अब अपनी जांच का रुख पीड़ित की ओर भी मोड़ दिया है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार:
- पुराना आपराधिक रिकॉर्ड: पारस ज्वेलर्स के मालिक गुरमीत सिंह के खिलाफ वर्ष 2020 में भी नकली गहने बनाने का मामला दर्ज हो चुका है।
- संदिग्ध बिल: पुलिस को शक है कि चोरी हुए गहनों के जो बिल ज्वैलर द्वारा पेश किए गए हैं, उनमें गड़बड़ी हो सकती है। फिलहाल इन बिलों की फोरेंसिक जांच की जा रही है।

संगठित गिरोह का हाथ, 12 अभी भी फरार
एसपी सिटी नरिंदर सिंह ने बताया कि इस चोरी के पीछे एक बहुत बड़ा और संगठित गिरोह सक्रिय है। पुलिस अब तक 4 आरोपियों को दबोच चुकी है, लेकिन गैंग के करीब एक दर्जन सदस्य अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। यह गिरोह न केवल शहर बल्कि दूसरे राज्यों और शहरों में भी चोरी के माल को खपाने का नेटवर्क रखता है।
”हम इस मामले के हर पहलू को गहराई से खंगाल रहे हैं। बरामद चांदी के असली या नकली होने के पीछे की सच्चाई जल्द सामने आ जाएगी। अगर बिलों या गहनों की शुद्धता में कोई गड़बड़ी पाई गई, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
— नरिंदर सिंह, एसपी सिटी








