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जलवायु परिवर्तन का कोप: 20°C से ऊपर तापमान रहने पर बदल रहा है ‘बर्थ पैटर्न’

सावधान! तपती गर्मी बदल रही है ‘बर्थ पैटर्न’, भारत और अफ्रीका के 50 लाख डेटा से हुआ बड़ा खुलासा

नई दिल्ली/चेन्नई: जलवायु परिवर्तन और बढ़ता तापमान न केवल पर्यावरण को बदल रहा है, बल्कि अब यह मानव जन्म के बुनियादी पैटर्न पर भी हमला कर रहा है। प्रतिष्ठित जर्नल ‘Demography’ में प्रकाशित एक ताजा अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। शोध के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक गर्मी का सामना करने वाली महिलाओं में लड़कों को जन्म देने की संभावना कम हो सकती है।

50 लाख जन्मों के डेटा का विश्लेषण

​इस व्यापक अध्ययन में भारत और उप-सहारा अफ्रीका के 50 लाख से अधिक जन्मों के डेटा का गहराई से विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि तापमान और जन्म के समय लिंग अनुपात (Sex Ratio at Birth) के बीच एक सीधा और चिंताजनक संबंध है।

तापमान का असर: भारत और अफ्रीका में अलग-अलग पैटर्न

​अध्ययन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • तापमान की सीमा: जिन दिनों अधिकतम तापमान 20°C से ऊपर रहा, उन परिस्थितियों में लड़कों के जन्म की संख्या में गिरावट दर्ज की गई।
  • त्रैमास (Trimesters) का प्रभाव: उप-सहारा अफ्रीका में गर्भावस्था के पहले त्रैमास में गर्मी का असर दिखा, जबकि भारत में यह प्रभाव मुख्य रूप से दूसरे त्रैमास (Second Trimester) के दौरान अधिक प्रभावी पाया गया।
  • आंकड़ों का खेल: 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान के संपर्क में आने से लड़कों के जन्म की संभावना में लगभग 0.014 प्रतिशत अंक की कमी देखी गई।

ग्रामीण और अधिक उम्र की महिलाएं ‘सॉफ्ट टारगेट’

​शोध के अनुसार, गर्मी का यह दुष्प्रभाव हर महिला पर एक जैसा नहीं है। इसका सबसे ज्यादा असर उन माताओं पर देखा गया जो:

  1. ​ग्रामीण क्षेत्रों में रहती हैं (जहाँ कूलिंग सुविधाओं की कमी है)।
  2. ​जिनकी उम्र अपेक्षाकृत अधिक है।
  3. ​जो पहले से कई बच्चों को जन्म दे चुकी हैं।

वैज्ञानिक तर्क: क्यों कम हो रहे लड़के?

​वैज्ञानिकों ने इस घटना को ‘ट्रिवर्स-विलार्ड परिकल्पना’ (Trivers–Willard hypothesis) से जोड़ा है। इस सिद्धांत के अनुसार, प्रतिकूल पर्यावरणीय स्थितियों में पुरुष भ्रूण (Male Embryo) अधिक संवेदनशील होते हैं। मादा भ्रूण की तुलना में पुरुष भ्रूण के गर्भ में जीवित रहने की संभावना कठिन परिस्थितियों में कम हो जाती है, जिसे एक प्राकृतिक चयन प्रक्रिया माना जा सकता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य चेतावनी

​चेन्नई स्थित श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट की विशेषज्ञ विद्या वेणुगोपाल और शोधकर्ता जेन हर्स्ट ने आगाह किया है कि बढ़ती गर्मी केवल लिंग अनुपात ही नहीं, बल्कि अन्य गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा कर रही है:

    • प्री-टर्म बर्थ: गर्मी के कारण समय से पहले प्रसव (Pre-term birth) का खतरा वैश्विक स्तर पर 25% तक बढ़ जाता है। तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में यह जोखिम तीन गुना तक देखा गया है।
    • अन्य बीमारियां: हाई ब्लड प्रेशर, गर्भकालीन डायबिटीज और नवजात का वजन कम होना जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।

विशेषज्ञ की राय: “जलवायु परिवर्तन के इस दौर में सरकारों को गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को ‘अति संवेदनशील’ (Vulnerable) समूह मानकर उनके लिए विशेष सुरक्षा नीतियां बनानी होंगी।”

Ami News
Author: Ami News

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