साहनेवाल: सरकारी स्कूल बना ‘बारूद का ढेर’, मासूमों की जान दांव पर लगाकर हो रहा था गैस रिफिलिंग का अवैध खेल
चंडीगढ़ रोड स्थित प्राइमरी स्कूल में अध्यापकों की मौजूदगी में सिलेंडरों की पलटी; शिक्षा विभाग ने दिए सख्त कार्रवाई के आदेश

लुधियाना/साहनेवाल:विधानसभा हलका साहनेवाल के अंतर्गत चंडीगढ़ रोड पर स्थित एक सरकारी प्राइमरी स्कूल से लापरवाही का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। स्कूल परिसर, जहाँ सैकड़ों मासूमों का भविष्य गढ़ा जाता है, वहाँ अवैध रूप से गैस सिलेंडरों की पलटी (एक सिलेंडर से दूसरे में गैस ट्रांसफर) का खतरनाक काम किया जा रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब कथित तौर पर स्कूल स्टाफ और अध्यापकों की मौजूदगी में हो रहा था।

हादसे को न्योता: ‘बंसरी’ से हो रहा था मौत का खेल
जानकारी के अनुसार, यह घटना पिछले शनिवार की है। स्कूल परिसर के भीतर ही ‘बंसरी’ नामक उपकरण का उपयोग कर एक घरेलू सिलेंडर से दूसरे में गैस भरी जा रही थी। जिस वक्त यह अवैध कार्य चल रहा था, मासूम बच्चे आसपास ही खेल रहे थे। विशेषज्ञों के अनुसार, गैस ट्रांसफर के दौरान एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े धमाके का कारण बन सकती है, जिससे पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो सकती थी। घटना के बाद से ही स्कूल के बच्चे डरे और सहमे हुए हैं।
जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता स्कूल प्रशासन
जब इस मामले पर मीडिया ने सवाल उठाए, तो स्कूल के मुख्य शिक्षक रमिंदर सिंह ने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, कैमरे के सामने आने पर स्टाफ ने अपनी गर्दन बचाने के लिए सारा दोष सुरक्षा गार्ड और मिड-डे मील वर्करों पर मढ़ने की कोशिश की। कुछ कर्मचारियों ने दबी जुबान में स्वीकार किया कि बचे हुए गैस को बचाने के चक्कर में वे अक्सर सिलेंडरों की पलटी करते हैं।

मिड-डे मील की बर्बादी भी आई सामने
जांच के दौरान केवल सुरक्षा में चूक ही नहीं, बल्कि अन्न के अपमान का मामला भी प्रकाश में आया। स्कूल में बच्चों के लिए बनने वाले मिड-डे मील के भोजन को बेहद लापरवाही से फेंका जा रहा था, जिससे स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
“यह सीधे तौर पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला है। गैस रिफिलिंग के दौरान होने वाले धमाके जानलेवा होते हैं। स्कूल परिसर में ऐसी अवैध गतिविधि किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। स्कूल हेड से लेकर दोषी पाए जाने वाले हर कर्मचारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
— मनोज कुमार, डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी








