सिल्ट सफाई मामला: पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, पहले NGT जाने का निर्देश

नदियों और बांधों से सिल्ट (गाद) हटाने के मामले में पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई सीधी राहत नहीं मिल पाई है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह सबसे पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पास जाए और वहीं अपनी बात रखकर अंतरिम रोक हटाने की गुहार लगाए।

क्या है पूरा विवाद?
यह मामला NGT द्वारा 11 फरवरी 2026 को पारित एक अंतरिम आदेश से जुड़ा है। इस आदेश में ट्रिब्यूनल ने पंजाब सरकार को सिल्ट निकालने के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति तो दी थी, लेकिन डी-सिल्टिंग (सफाई/खुदाई) के वास्तविक काम पर तब तक रोक लगा दी थी, जब तक ट्रिब्यूनल से अंतिम मंजूरी न मिल जाए। इसी रोक के खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि यह विवाद पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी जा चुका है।
- PIL का इतिहास: हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जहां शुरुआत में काम पर रोक लगी थी।
- रोक हटी: 19 सितंबर 2025 को तथ्यों की समीक्षा के बाद हाईकोर्ट ने रोक हटा दी थी, हालांकि याचिका अब भी लंबित है।
- सरकार का पक्ष: राज्य सरकार ने दलील दी कि बार-बार अलग-अलग कानूनी मंचों का सहारा लेकर जनहित के इस कार्य को जानबूझकर रुकवाने का प्रयास किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देश
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित आदेश दिए:
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- NGT में आवेदन: राज्य सरकार NGT के समक्ष आवेदन दाखिल कर सुनवाई को जल्दी (Preponement) करने और रोक हटाने की मांग करे।
- तथ्यों का उल्लेख: आवेदन में हाईकोर्ट में हुई पिछली सभी कार्यवाहियों का स्पष्ट ब्योरा दिया जाए।
- एक सप्ताह का समय: सुप्रीम कोर्ट ने NGT से अनुरोध किया है कि मामले की तात्कालिकता को देखते हुए राज्य के आवेदन पर संभव हो तो एक सप्ताह के भीतर फैसला लिया जाए।
“हमने फिलहाल मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यदि NGT के फैसले के बाद जरूरत पड़ी, तो राज्य सरकार दोबारा सुप्रीम कोर्ट आ सकती है।” > — सुप्रीम कोर्ट पीठ

वर्तमान स्थिति: काम पर सस्पेंस बरकरार
फिलहाल पंजाब सरकार के लिए स्थिति ‘यथास्थिति’ (Status Quo) जैसी ही है:
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- टेंडर प्रक्रिया: सरकार टेंडर जारी रख सकती है और प्रशासनिक कागजी कार्रवाई पूरी कर सकती है।
- मैदानी काम: नदियों या जलाशयों से कीचड़ निकालने का भौतिक कार्य NGT की हरी झंडी मिलने तक शुरू नहीं होगा।
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अब सबकी निगाहें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह मानसून से पहले सिल्ट सफाई की अनुमति देता है या नहीं।








