अर्नी विश्वविद्यालय में ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

इंदौरा: अर्नी विश्वविद्यालय ने समाज से बाल विवाह जैसी कुरीति को जड़ से मिटाने के संकल्प के साथ 100-दिवसीय ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के अंतर्गत एक विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कांगड़ा (धर्मशाला) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “आशा गतिविधि” रहा।
कुलाधिपति के मार्गदर्शन में जागरूकता की पहल
विश्वविद्यालय के माननीय कुलाधिपति डॉ. विवेक सिंह के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी और शैक्षणिक समुदाय को बाल विवाह के कानूनी परिणामों, उनके अधिकारों और सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने भारी संख्या में भाग लेकर इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।

कानूनी बारीकियों पर विशेषज्ञों का व्याख्यान
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में एसडीएलएससी इंदौरा के पैनल अधिवक्ता पी.पी. सिंह, अधिवक्ता प्रशांत सिंह और आशा यूनिट के सदस्य उपस्थित रहे।
- बाल विवाह के दुष्परिणाम: अधिवक्ता पी.पी. सिंह ने ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006’ पर चर्चा करते हुए बताया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है। उन्होंने कानूनी सजा, दंड के प्रावधानों और नाबालिगों के संरक्षण से संबंधित जानकारी साझा की।
- न्याय तक सुलभ पहुँच: अधिवक्ता प्रशांत सिंह ने नालसा (NALSA) योजना 2024 पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे गरीब और वंचित वर्ग निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने मोटर वाहन अधिनियम और नशे के दुष्परिणामों पर भी छात्रों को सचेत किया।

संवादात्मक सत्र और संकल्प
कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली हिस्सा ‘प्रश्न-उत्तर सत्र’ रहा, जहाँ विद्यार्थियों ने कानूनी पेचीदगियों पर विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने एक सुर में बाल विवाह मुक्त समाज बनाने और विधिक जागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प लिया।








