बिहार के गलियों से धरा गया ‘गांधी लॉटरी’ का मास्टरमाइंड, लुधियाना पुलिस की बड़ी स्ट्राइक

लुधियाना : कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ अपनी मुहिम में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। ‘गांधी लॉटरी लुधियाना’ के नाम पर मासूम लोगों की गाढ़ी कमाई डकारने वाले एक शातिर ठग को पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार किया है। पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा (IPS) के सख्त निर्देशों और डीसीपी हरपाल सिंह (PPS) की निगरानी में साइबर सेल ने इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कमर तोड़ दी है।
ऐसे बिछाया गया गिरफ्तारी का जाल
एडीसीपी वैभव सहगल और एसीपी (साइबर क्राइम) मुराद जसवीर सिंह गिल के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम का गठन किया गया था। इस टीम ने बिहार के विभिन्न जिलों में गुप्त रूप से दबिश दी और आरोपी प्रभात कुमार को दबोच लिया।
मामला क्या था? > 19 फरवरी 2026 को दर्ज एफआईआर नंबर 13 के अनुसार, एक पीड़ित को 5 लाख रुपये की लॉटरी जीतने का झांसा देकर लाखों रुपये की चपत लगाई गई थी। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की थी।

ठगी का ‘मॉडस ऑपरेंडी’: व्हाट्सएप पर आता था मौत का पैगाम
जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था:
- फर्जी नाम: ‘गांधी लॉटरी लुधियाना’ के नाम का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीता जाता था।
- लालच का दांव: व्हाट्सएप पर बधाई संदेश भेजकर 5 लाख या उससे अधिक की लॉटरी का सपना दिखाया जाता।
- किस्तों में वसूली: एक बार जाल में फंसने के बाद, आरोपी रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग चार्ज और टैक्स के नाम पर छोटी-छोटी किस्तों में मोटी रकम वसूलते थे।
रिमांड के दौरान बड़े खुलासे की उम्मीद
माननीय अदालत ने आरोपी प्रभात कुमार का 24 फरवरी 2026 तक पुलिस रिमांड मंजूर किया है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए कई और चौंकाने वाले नाम सामने आएंगे।

पुलिस की अपील: लालच से बचें
पुलिस प्रशासन ने जनता को सतर्क करते हुए कहा है कि:
- किसी भी अनजान व्हाट्सएप संदेश या कॉल पर भरोसा न करें।
- लॉटरी के नाम पर पैसे मांगने वालों की तुरंत सूचना दें।
- किसी भी संदेह की स्थिति में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी थाने जाएं।








