पठानकोट विशेष पड़ताल: नौनिहालों की सुरक्षा से खिलवाड़!
ग्राउंड रिपोर्ट: क्या केवल कागजों पर हैं सुरक्षा निर्देश? क्यों गायब हैं महिला अटेंडेंट?

पठानकोट: हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों में स्कूली बच्चों के साथ हुई अनहोनी की घटनाओं ने अभिभावकों की रातों की नींद उड़ा दी है। पठानकोट के अभिभावकों ने अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सवाल सीधा है— क्या आपके बच्चे की स्कूल बस वास्तव में सुरक्षित है, या वह किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रही है?
नियमों की धज्जियां: ‘सेफ स्कूल वाहन’ योजना का सच
सुप्रीम कोर्ट और ‘सेफ स्कूल वाहन’ पॉलिसी के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद, पठानकोट के कई निजी स्कूलों की बसों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नदारद हैं।
- महिला अटेंडेंट का अभाव: हमारी पड़ताल में सामने आया कि बसों में छोटी बच्चियां और छात्राएं सफर करती हैं, लेकिन वहां कोई महिला अटेंडेंट नहीं होती। पुरुष हेल्परों की मौजूदगी छात्राओं को असहज करती है।
- स्टाफ का टोटा: चौंकाने वाली बात तो यह है कि कई स्कूल बसों में तो पुरुष या महिला कोई भी अटेंडेंट मौजूद नहीं होता। ड्राइवर ही बच्चों को चढ़ाने-उतारने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जो भारी जोखिम का काम है।
- कबाड़ में तब्दील सुरक्षा उपकरण: निरीक्षण के दौरान कई बसों में ‘फर्स्ट एड बॉक्स’ खाली मिले और ‘फायर एक्सटिंग्विशर’ की एक्सपायरी डेट महीनों पहले निकल चुकी थी।

कानून का डंडा: क्या कहते हैं नियम?
स्कूल प्रबंधन को यह समझना होगा कि सुरक्षा कोई ‘विकल्प’ नहीं, बल्कि ‘कानूनी अनिवार्यता’ है:
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- SC Guidelines: बस में प्रशिक्षित अटेंडेंट का होना अनिवार्य है।
- POCSO Act: बच्चों की मानसिक और शारीरिक सुरक्षा के लिए स्कूल प्रबंधन सीधे तौर पर जिम्मेदार है।
- Transport Rules: स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन और ड्राइवर का कम से कम 5-10 साल का अनुभव अनिवार्य है।
”जब बस में बच्चियां हों, तो महिला हेल्पर का होना महज एक नियम नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी है। प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है।” — एक चिंतित अभिभावक, पठानकोट

बड़ी चेतावनी: AMI NEWS की ग्राउंड जीरो पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
अभिभावकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए AMI NEWS अब चुप नहीं बैठेगा। हमने इस लापरवाही को जड़ से मिटाने का संकल्प लिया है।
सावधान रहें स्कूल प्रबंधक! AMI NEWS जल्द ही ग्राउंड पर जाकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर स्कूल की बसों की हकीकत बताएगा कि असल में सड़कों पर क्या सच्चाई है। हम लाइव चेकिंग करेंगे और उन स्कूलों को बेनकाब करेंगे जो बच्चों की जान को जोखिम में डालकर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।
हमारी मांगें:
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- लाइव इंस्पेक्शन: पुलिस और प्रशासन द्वारा बसों की नियमित औचक जांच (Surprise Inspection) हो।
- 100% महिला स्टाफ: छात्राओं वाली बसों में महिला अटेंडेंट की उपस्थिति अनिवार्य हो।
- हेल्पलाइन नंबर: हर बस के पीछे जिला प्रशासन और पुलिस का शिकायत नंबर अनिवार्य रूप से लिखा हो।
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बड़ा सवाल:
क्या प्रशासन इन शिक्षा के सौदागरों और बस माफियाओं पर नकेल कसेगा, या किसी मासूम के साथ अनहोनी का इंतज़ार किया जा रहा है?”
हमारी अगली रिपोर्ट का इंतजार करें… क्योंकि यह आपके बच्चे की सुरक्षा का सवाल है।








