वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

देश के मुख्य न्यायाधीश और एयर चीफ मार्शल देने वाला संस्थान विलय की कगार पर; छात्रों और अभिभावकों ने सड़क पर उतरकर जताया रोष।

156 साल की गौरवशाली विरासत पर ‘प्रशासनिक’ प्रहार: नूरपुर का ऐतिहासिक स्कूल अब वजूद की जंग में

नूरपुर :(ऋषि महाजन)नूरपुर की पहचान और 156 वर्षों के गौरवशाली इतिहास को समेटे हुए राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल (बॉयज) पर आज अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। 1869 में स्थापित इस ‘शिक्षा के मंदिर’ को प्रशासन द्वारा वकशी टेक चंद गर्ल्स स्कूल में विलय (Merge) करने के नोटिफिकेशन ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और भावुकता की लहर पैदा कर दी है। यह केवल एक स्कूल को बंद करने का निर्णय नहीं है, बल्कि नूरपुर की उस विरासत को मिटाने जैसा है जिसने देश को दिग्गज व्यक्तित्व दिए हैं।

इतिहास के पन्नों में दर्ज है इसकी शान

​यह संस्थान केवल एक इमारत नहीं, बल्कि एक नर्सरी है जहां से देश के कई महान नायक निकले।

  • मेहरचंद महाजन: देश के तीसरे मुख्य न्यायाधीश।
  • वकशी टेकचंद: संविधान सभा के सदस्य।
  • सत महाजन व केवल सिंह पठानियां: पूर्व मंत्री एवं जननायक।
  • एस. चांद: पूर्व एयर चीफ मार्शल।

​1869 में एक मिडिल स्कूल से शुरू हुआ यह सफर 1986 में सीनियर सेकेंडरी स्कूल तक पहुँचा। ऐतिहासिक किले के भीतर स्थित इस स्कूल में कभी 2000 से ज्यादा छात्र पढ़ते थे, जिनकी गूँज पंजाब तक सुनाई देती थी।

क्यों उपजा विवाद?

​हालिया प्रशासनिक निर्णय के तहत इस स्कूल को कन्या विद्यालय में मर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

    • वर्तमान स्थिति: स्कूल में अभी भी 212 छात्र और 30 शिक्षकों का स्टाफ है।
    • तर्क और बाधा: पुरातत्व विभाग के नियमों के कारण पुराने भवन की मरम्मत न हो पाना और छात्र संख्या में कमी को आधार बनाया जा रहा है।
    • जनता का पक्ष: स्थानीय निवासी सजीव सूरी और पूर्व परिषद उपप्रधान यशपाल सोगा का कहना है कि सरकार को इसे आधुनिक सुविधाएं देकर पुनर्जीवित करना चाहिए, न कि इसका अस्तित्व खत्म करना चाहिए।

​”यह स्कूल नूरपुर की शान है। इसे गर्ल्स स्कूल में मर्ज करना हमारी ऐतिहासिक धरोहर के साथ खिलवाड़ है। सरकार को अपना निर्णय वापस लेना चाहिए।” — स्थानीय नागरिक

सड़कों पर उतरा जन-आक्रोश

​इस निर्णय के विरोध में राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्रों और उनके अभिभावकों ने नूरपुर शहर में एक विशाल रोष रैली निकाली। हाथों में तख्तियां लिए और नारेबाजी करते हुए छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी पहचान को मिटने नहीं देंगे। रैली के पश्चात उप-मंडल अधिकारी (SDM) के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा गया।

प्रिंसिपल का पक्ष:

स्कूल की प्रिंसिपल सुनीता सागर ने पुष्टि की है कि स्कूल को बक्शी टेकचंद गर्ल्स स्कूल के साथ मर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसका छात्र और अभिभावक पुरजोर विरोध कर रहे हैं।

भविष्य पर सवाल?

​क्या एक प्रशासनिक आदेश 156 साल की यादों और उपलब्धियों पर भारी पड़ेगा? क्या सरकार उन भावनाओं का सम्मान करेगी जो इस स्कूल की ईंट-ईंट से जुड़ी हैं? नूरपुर की जनता अब सरकार से केवल एक आदेश नहीं, बल्कि अपनी विरासत के संरक्षण का आश्वासन चाहती है।

संपादकीय सुझाव 

प्रमुख उपलब्धियां

ऐतिहासिक मील के पत्थर

देश को दिया तीसरा मुख्य न्यायाधीश

1869: स्थापना (M.B. Secondary School)

एयर चीफ मार्शल की शुरुआती शिक्षा

1928: हाई स्कूल का दर्जा

संविधान सभा के सदस्य की कर्मभूमि

1962: राजकीय हाई स्कूल बना

पंजाब और अन्य जिलों तक था प्रभाव

1986: सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अपग्रेड

 

Ami News
Author: Ami News

trfgcvkj.blkjhgfd

Leave a Comment

और पढ़ें

Horoscope

Weather

और पढ़ें
error: Content is protected !!