21 फरवरी 2026 – भाषा, तकनीक और कूटनीति का संगम
नई दिल्ली: आज का दिन वैश्विक पंचांग पर कई सुनहरे अक्षरों को समेटे हुए है। जहाँ दुनिया भाषाई विविधता को सहेजने का संकल्प ले रही है, वहीं भारत की राजधानी दिल्ली से लेकर तमिलनाडु के चुनावी गलियारों तक आज बड़ी हलचलों का दिन है।
1. अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस: ‘बहुभाषी शिक्षा पर युवाओं की आवाज़’
आज पूरा विश्व ‘अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ मना रहा है। यूनेस्को द्वारा घोषित इस वर्ष की थीम “बहुभाषी शिक्षा के लिए युवाओं की आवाज़” (Youth voices on multilingual education) है।
- महत्व: यह दिन 1952 के भाषा आंदोलन के शहीदों को समर्पित है।
- आज का संदेश: डिजिटल युग में अपनी जड़ों और अपनी बोली को तकनीक के माध्यम से जीवित रखना।
2. भारत की तकनीकी छलांग: ‘India AI Impact Expo’
राजधानी के भारत मंडपम में आज India AI Impact Expo का आयोजन हो रहा है।
- यह एक्सपो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के क्षेत्र में भारत की बढ़ती शक्ति का प्रदर्शन है।
- आज का दिन देश के स्टार्टअप्स और वैज्ञानिकों के लिए विशेष है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि में AI के उपयोग पर दुनिया को नई राह दिखा रहे हैं।
3. कूटनीति और राजनीति के बड़े घटनाक्रम
- पीएम मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति की मुलाकात: आज दिल्ली में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता है, जो वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूत करेगी।
- संसदीय सक्रियता: राहुल गांधी की मानहानि मामले में पेशी और तमिलनाडु चुनाव 2026 के लिए DMK की सीट-बंटवारा समिति का गठन आज की बड़ी राजनीतिक खबरें हैं।
- रक्षा क्षेत्र: विशाखापत्तनम में चल रहा बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन 2026’ आज अपने चरम पर है।
4. आध्यात्मिक और ज्योतिषीय पहलू
आज का दिन धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत शुभ है:
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- विनायक चतुर्थी: फाल्गुन मास की चतुर्थी होने के कारण आज भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है।
- शुभ संयोग: आज शनिवार और रेवती नक्षत्र का संयोग है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में नई व्यापारिक शुरुआत और कागजी कार्रवाई के लिए बहुत उत्तम माना गया है।
संपादकीय टिप्पणी: आज का दिन हमें याद दिलाता है कि हम अपनी मातृभाषा के गौरव को साथ लेकर आधुनिक तकनीक के शिखर को छू सकते हैं।

आज का पंचांग: फाल्गुन मास की विनायक चतुर्थी और रेवती नक्षत्र का शुभ संयोग
नई दिल्ली/वाराणसी: भारतीय काल गणना के अनुसार आज, शनिवार, 21 फरवरी 2026 का दिन आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत मंगलकारी है। आज फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे हिंदू धर्म में ‘विनायक चतुर्थी’ के रूप में मनाया जाता है। विशेष बात यह है कि आज शनिवार होने के कारण ‘शनि-गणेश’ की आराधना का एक दुर्लभ मेल बन रहा है।
आज की तिथि और नक्षत्र का गणित
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज चतुर्थी तिथि दोपहर तक रहेगी, जिसके बाद पंचमी तिथि का आगमन होगा। आज का दिन रेवती नक्षत्र के प्रभाव में है, जो नक्षत्रों की श्रेणी में अंतिम और बेहद सौम्य नक्षत्र माना जाता है। रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध हैं, जो बुद्धि और वाणी के कारक हैं, जबकि इसके देवता ‘पूषा’ हैं, जो पोषण और सुरक्षा का प्रतीक माने जाते हैं।
विनायक चतुर्थी: विघ्नहर्ता की विशेष पूजा
आज के दिन भगवान गणेश की पूजा का विधान है। मान्यता है कि फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी का व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन के सभी अटके हुए कार्य पूर्ण होते हैं। आज के दिन “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करना और गणेश जी को दूर्वा (घास) अर्पित करना शुभ फलदायी माना गया है। दोपहर का समय गणेश पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

शनि दोष से मुक्ति का अवसर
चूंकि आज शनिवार है, इसलिए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से प्रभावित जातकों के लिए आज का दिन विशेष है। शनिवार को पड़ने वाली चतुर्थी पर गणेश जी और हनुमान जी की पूजा करने से शनि देव का नकारात्मक प्रभाव कम होता है। आज के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और काली उड़द का दान करना उत्तम रहेगा।
आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, कार्यों की सफलता के लिए सही समय का चयन आवश्यक है:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:13 से 06:03 तक। यह समय ध्यान और पूजा के लिए सर्वोत्तम है।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 12:12 से दोपहर 12:57 तक। किसी भी नए काम की शुरुआत के लिए यह दिन का सबसे शुभ समय है।
- राहुकाल: सुबह 09:44 से 11:10 तक। ज्योतिष के अनुसार इस समय में शुभ कार्यों और लंबी यात्राओं से बचना चाहिए।
आज का विशेष योग
आज ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ का आंशिक प्रभाव भी बना हुआ है। यह योग उन लोगों के लिए वरदान है जो किसी नई संपत्ति की खरीदारी या निवेश की योजना बना रहे हैं। रेवती नक्षत्र में चंद्रमा का गोचर होने के कारण आज मानसिक शांति और आध्यात्मिक चिंतन के लिए समय अनुकूल है।
आज का मंत्र
“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”








