पठानकोट एयरबेस की सुरक्षा ताक पर: 2016 के जख्मों को भूल प्रशासन ने ‘सिकंदर मार्केट’ में दी अवैध निर्माण को हरी झंडी?

क्या हम 2016 के उस खौफनाक आतंकी हमले को भूल चुके हैं? क्या देश की सरहद की सुरक्षा से समझौता करना अब एक आम बात हो गई है? पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन, जो सामरिक दृष्टि से भारत के सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों में से एक है, आज फिर खतरे के साये में है। AMI News के बड़े खुलासे में सामने आया है कि एयरफोर्स की बाउंड्री वॉल के पास ‘निर्धारित दूरी’ के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए धड़ल्ले से निर्माण कार्य जारी है।

नियमों की धज्जियां: सिकंदर मार्केट बना ‘सॉफ्ट टारगेट’?
एयरफोर्स स्टेशन के चारों ओर सुरक्षा के लिहाज से एक ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’ (No Construction Zone) निर्धारित है। लेकिन सिकंदर मार्केट के पास जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है:

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- अवैध निर्माण: सुरक्षा घेरे (Boundary Wall) के बिल्कुल करीब व्यावसायिक और निजी निर्माण किए जा रहे हैं।
- नियमों की अनदेखी: रक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार बाउंड्री से एक निश्चित दूरी तक किसी भी स्थाई निर्माण पर पाबंदी है, जिसे पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
- सिविल प्रशासन का मौन: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि नाक के नीचे हो रहे इस निर्माण पर सिविल प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है।

“क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? बाउंड्री के पास बढ़ती भीड़ और निर्माण कार्य आतंकियों के लिए जासूसी या छिपने का आसान जरिया बन सकते हैं।” — AMI News विशेष रिपोर्ट

2016 की टीस और आज की लापरवाही
जनवरी 2016 में हुए हमले ने पूरे देश को हिला दिया था। उस वक्त भी सुरक्षा घेरे में सेंधमारी पर सवाल उठे थे। आज उसी एयरबेस के पास अवैध कब्जों की भरमार सुरक्षा एजेंसियों की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी है। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन अवैध निर्माणों को नहीं रोका गया, तो यह भविष्य में देश के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

प्रमुख सवाल जो प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हैं:
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- किसकी अनुमति से एयरफोर्स स्टेशन के पास ये निर्माण हो रहे हैं?
- क्या नगर निगम और जिला प्रशासन ने सुरक्षा नियमों की फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी हैं?
- सिकंदर मार्केट में बढ़ते इन कब्जों के पीछे किन रसूखदारों का हाथ है?
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निष्कर्ष
पठानकोट की सुरक्षा केवल एक शहर की नहीं, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा है। ‘निर्धारित दूरी’ के नियमों को ताक पर रखकर किया गया हर एक निर्माण सुरक्षा घेरे में एक छेद की तरह है। अब देखना यह होगा कि AMI News के इस खुलासे के बाद क्या सरकार जागती है या फिर से फाइलें धूल फांकती रहेंगी।








