श्रम संहिताओं के खिलाफ चंबा में गरजा मजदूर, सीटू के बैनर तले राष्ट्रव्यापी हड़ताल

चंबा:( जितेंद्र मेहरा) केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही चार नई श्रम संहिताओं के विरोध में गुरुवार को जिला चंबा में मजदूर संगठनों ने अपनी ताकत दिखाई। सीटू (CITU) के बैनर तले आयोजित इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हजारों श्रमिकों ने सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इन कानूनों को ‘मजदूर विरोधी’ करार दिया।
भारी संख्या में उमड़े आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता
चंबा मुख्यालय में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में आंगनवाड़ी वर्कर, आशा वर्कर यूनियन और एनएचसी मजदूर संघ सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों के हजारों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारी उपायुक्त (DC) कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए, जहाँ से पूरे शहर में एक विशाल रोष रैली निकाली गई।
चार श्रम संहिताओं पर कड़ा एतराज
मजदूर नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा पारित चार संहिताओं—औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता, वेतन संहिता तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता—पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने 21 नवंबर 2025 को इन कानूनों को लागू करने के आदेश जारी कर मजदूरों के हितों पर चोट की है।

हड़ताल की मुख्य मांगें और आपत्तियां:
- नौकरी की सुरक्षा पर खतरा: आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि ‘फिक्स टर्म’ (निश्चित अवधि) रोजगार के प्रावधान से भविष्य में नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं रहेगी।
- लाइसेंस नियमों में ढील: पहले 20 मजदूरों पर लेबर लाइसेंस अनिवार्य था, जिसे अब बढ़ाकर 50 कर दिया गया है। इससे छोटे ठेकेदारों को श्रम विभाग की जवाबदेही से छूट मिल जाएगी।
- EPF में कटौती का विरोध: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में अंशदान को 12% से घटाकर 10% करने के फैसले को मजदूरों के आर्थिक नुकसान का कारण बताया गया।
- मानदेय में वृद्धि: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने वर्तमान 7-10 हजार रुपये के मानदेय को बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मांग दोहराई।
प्रशासन रहा अलर्ट
प्रदर्शन के दौरान शहर की कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विभिन्न चौक-चौराहों पर अतिरिक्त बल तैनात रहा।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सीटू नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल सांकेतिक विरोध नहीं है। यदि सरकार ने इन ‘काले कानूनों’ को वापस नहीं लिया और श्रमिकों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आने वाले समय में चंबा सहित पूरे प्रदेश में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।








