बिजली निजीकरण के खिलाफ बिजली बोर्ड कर्मचारियों का हुंकार, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
संशोधन विधेयक-2025 का विरोध; कहा—पहाड़ी राज्य में बढ़ेंगी दरें, ग्रामीण क्षेत्रों की होगी अनदेखी

नूरपुर ऋषि महाजन: हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL) के कर्मचारियों, अभियंताओं और पेंशनरों की संयुक्त कार्रवाई समिति ने बिजली वितरण के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति ने बिजली संशोधन विधेयक-2025 के माध्यम से वितरण कंपनियों के निजीकरण और क्रॉस-सब्सिडी समाप्त करने के प्रावधानों का कड़ा विरोध करते हुए प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है। यह ज्ञापन एसडीएम नूरपुर के माध्यम से प्रेषित किया गया।

सेवा या मुनाफा?
समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली केवल एक सेवा नहीं, बल्कि आम जनता की जीवनरेखा है। ऐसे में लाभ कमाने की मानसिकता से संचालित निजी कंपनियों के हाथों में वितरण व्यवस्था सौंपना हिमाचल जैसे पहाड़ी और ग्रामीण राज्य के लिए घातक साबित हो सकता है। समिति का तर्क है कि निजीकरण के बाद बिजली दरों में भारी वृद्धि की आशंका है और दूरदराज के घाटे वाले ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी हो सकती है।
सामाजिक दायित्वों पर खतरा
संयुक्त कार्रवाई समिति ने कहा कि वर्तमान में बोर्ड ग्रामीण विद्युतीकरण, किसानों को रियायती बिजली और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सब्सिडी जैसी सामाजिक जिम्मेदारियां निभा रहा है। निजी कंपनियां इन दायित्वों को निभाने में रुचि नहीं लेंगी, जिससे या तो उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा या सरकार पर अतिरिक्त भार पड़ेगा।
कर्मचारियों के भविष्य पर तलवार
समिति ने यह भी चिंता जताई कि निजीकरण से हजारों नियमित, आउटसोर्स और पेंशनभोगी कर्मचारियों की नौकरी और सेवा शर्तें असुरक्षित हो जाएंगी। वर्षों से अर्जित तकनीकी अनुभव और संस्थागत ज्ञान पर भी असर पड़ेगा, जिससे बिजली व्यवस्था की स्थिरता और विश्वसनीयता कमजोर पड़ सकती है।

अन्य राज्यों के उदाहरण से दी चेतावनी
देश के अन्य राज्यों का हवाला देते हुए समिति ने कहा कि जहां-जहां बिजली वितरण का निजीकरण हुआ, वहां दरों में बढ़ोतरी, सेवा संबंधी विवाद और जवाबदेही में कमी देखने को मिली है। संयुक्त कार्रवाई समिति ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बिजली संशोधन विधेयक-2025 में निजीकरण से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए।

मुख्य बिंदु (Quick Highlights)
- विधेयक पर ऐतराज: बिजली संशोधन विधेयक-2025 के निजीकरण प्रावधानों का कड़ा विरोध।
- दरों में वृद्धि: निजी कंपनियां आने से बिजली महंगी होने की प्रबल आशंका।
- ग्रामीण अनदेखी: दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित होने का डर।
- रोजगार संकट: हजारों नियमित और आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा।








