संगत में गैस संकट: 56 गांवों में चूल्हे ठंडे, ओटीपी के फेर में फंसी आम जनता

इंडेन गैस एजेंसी के मालिकों के बदलने और व्यवस्था की खामियों ने बढ़ाई उपभोक्ताओं की मुसीबत
संगत मंडी (बठिंडा): इलाके की एकमात्र ‘संगत इंडेन गैस एजेंसी’ के कामकाज में आई अव्यवस्था के कारण क्षेत्र के 56 गांवों और संगत मंडी के हजारों उपभोक्ता दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं। पिछले कई दिनों से गैस की सप्लाई न मिलने के कारण लोगों में भारी रोष है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसी प्रबंधन ओटीपी (OTP) का बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ रहा है, जबकि पर्दे के पीछे सिलेंडरों की कालाबाजारी की आशंका जताई जा रही है।
बार-बार मालिक बदलने से बिगड़ी व्यवस्था
स्थानीय लोगों के अनुसार, जब तक इस एजेंसी की कमान इंजीनियर रुपिंदरजीत सिंह के हाथ में थी, सप्लाई सुचारू रूप से चल रही थी। उनके बाद एजेंसी पहले रामपुरा और अब पटियाला के एक व्यक्ति को बेच दी गई। प्रबंधन में बार-बार हो रहे इस बदलाव का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। एजेंसी के आधिकारिक मोबाइल नंबर भी पिछले कई दिनों से बंद हैं, जिससे लोग शिकायत तक दर्ज नहीं करा पा रहे।
बाहरी एजेंसियों को भी रोका जा रहा
हैरानी की बात यह है कि जब संकट को देखते हुए बाहरी गैस एजेंसियों के कर्मचारियों ने क्षेत्र में सप्लाई देने की कोशिश की, तो उन्हें भी कथित तौर पर रोक दिया गया। उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि सिलेंडर उन लोगों को नहीं दिए जा रहे जिनके पास वैध कनेक्शन हैं, बल्कि उन्हें ऊंचे दामों पर ‘ब्लैक’ में बेचा जा रहा है।

ओटीपी और केवाईसी बनी बड़ी बाधा
प्रशासन की बेरुखी और एजेंसी के सख्त नियमों ने ग्रामीणों की कमर तोड़ दी है। गांवों में कई उपभोक्ता अनपढ़ हैं या उनके मोबाइल नंबर अपडेटेड नहीं हैं। ऐसे में ओटीपी न आने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
“एजेंसी के नंबर बंद हैं, अधिकारी सुन नहीं रहे। हम सिलेंडर के लिए कहां जाएं? ओटीपी के नाम पर हमें परेशान किया जा रहा है और गैस ब्लैक में बेची जा रही है।”
— पीड़ित उपभोक्ता
क्या कहते हैं एजेंसी मालिक?
जब इस संबंध में वर्तमान मालिक हरसरूप चौधरी से बात की गई, तो उन्होंने आरोपों को नकारते हुए कहा:
”हमने एक महीने पहले ही एजेंसी संभाली है। सरकार के नियमों के मुताबिक बिना ओटीपी सिलेंडर देना संभव नहीं है। कई ग्राहकों के मोबाइल नंबर अपडेट नहीं हैं या केवाईसी अधूरी है। कई बार उपभोक्ता का पंजीकृत मोबाइल घर पर नहीं होता, जिससे दिक्कत आती है। हम सिलेंडर रोकना नहीं चाहते, क्योंकि इसमें हमारा ही नुकसान है।”

प्रमुख समस्याएं एक नजर में:
- 56 गांव और संगत मंडी पूरी तरह से एक ही एजेंसी पर निर्भर।
- एजेंसी के दोनों मोबाइल नंबर लगातार बंद।
- केवाईसी (KYC) अपडेट न होने से ओटीपी की समस्या।
- प्रशासन द्वारा मामले में कोई ठोस हस्तक्षेप न करना।








