यूजीसी एक्ट के खिलाफ नूरपुर में फूटा आक्रोश, सवर्ण समाज ने भरी हुंकार
‘जातिवाद नहीं चलेगा’ के नारों से गूंजा शहर; तहसीलदार के जरिए राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
नूरपुर : ( ऋषि महाजन) केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित यूजीसी (इक्विटी) रेगुलेशंस 2026 के विरोध में नूरपुर में सामान्य वर्ग का गुस्सा ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा। क्षेत्र के सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और केंद्र सरकार की नीतियों को ‘विभाजनकारी’ करार देते हुए जमकर नारेबाजी की। चौगान मैदान से शुरू हुई यह आक्रोश रैली उपमंडल अधिकारी कार्यालय पर जाकर संपन्न हुई, जहां प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन तहसीलदार के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल को सौंपा।

सामाजिक समरसता पर हमला है यह एक्ट
रैली को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार यूजीसी एक्ट के बहाने समाज को जातियों में बांटने का षड्यंत्र रच रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कानून देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा है और इससे शिक्षण संस्थानों में भाईचारे के बजाय वैमनस्य की भावना पैदा होगी।

अपनों ने ही घेरी अपनी सरकार
प्रदर्शन के दौरान दिलचस्प मोड़ तब आया जब पूर्व समिति सदस्य राकेश कुकी ने अपनी ही पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
”मैं स्वयं भाजपा का सक्रिय सदस्य हूं, लेकिन सामान्य वर्ग के हितों की अनदेखी और इस ‘काले कानून’ पर पार्टी के बड़े नेताओं की चुप्पी बेहद शर्मनाक है। सरकार जानबूझकर सामान्य वर्ग को हाशिए पर धकेल रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

19 तारीख तक का अल्टीमेटम
पूर्व प्रधान सतवीर सिंह ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 19 तारीख (सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के मद्देनजर) तक इस कानून पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। उन्होंने आने वाले समय में चक्का जाम और बड़े स्तर पर जनांदोलन की चेतावनी दी। वहीं, राजेश पठानिया और शेखर पठानिया ने चिंता जताई कि इस एक्ट से शिक्षण संस्थानों में छात्रों के बीच विवाद बढ़ेंगे, जिससे पुलिस और न्यायपालिका पर अनावश्यक बोझ पड़ेगा।

न्यायपालिका पर टिकी उम्मीदें
प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में इस एक्ट के क्रियान्वयन पर लगाई गई रोक का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने समय पर हस्तक्षेप कर देश को सामाजिक बिखराव से बचाया है। रैली के दौरान “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” और “पहले हम हिंदू हैं” जैसे नारों के जरिए एकजुटता का संदेश दिया गया।

मुख्य बिंदु:
- स्थान: चौगान मैदान से एसडीएम कार्यालय, नूरपुर।
- प्रमुख मांग: यूजीसी एक्ट 2026 को तत्काल प्रभाव से रद्द करना।
- आरोप: सामान्य वर्ग को कुचलने और जातिवाद फैलाने का प्रयास।
- चेतावनी: मांगें न मानने पर भविष्य में ‘चक्का जाम’ की धमकी।








