पैसों की नहीं, इंसानियत की जीत: नूरपुर अस्पताल में बुजुर्ग महिला को मिला नया जीवन
235 ग्राम की जटिल रसौली का सफल ऑपरेशन, निजी अस्पतालों के भारी-भरकम खर्च से मिली राहत

सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता का भरोसा एक बार फिर गहरा हुआ है। नूरपुर सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने एक 66 वर्षीय बुजुर्ग महिला के गले से 235 ग्राम वजनी रसौली (ट्यूमर) को सफलतापूर्वक निकालकर उसे नया जीवन प्रदान किया है। यह ऑपरेशन न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि गरीब परिवारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण भी है।

निजी अस्पताल मांग रहे थे 80 हजार, यहां हुआ मुफ्त इलाज
शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव हरनेरा की रहने वाली बुजुर्ग महिला लंबे समय से गले में उभरी इस बड़ी रसौली से परेशान थी। इसके कारण उसे न केवल बोलने में तकलीफ हो रही थी, बल्कि खाना-पीना भी दूभर हो गया था। परिजनों के अनुसार, निजी अस्पतालों में इस ऑपरेशन का खर्च 70 से 80 हजार रुपये बताया गया था, जो उनके बजट से बाहर था। लेकिन नूरपुर सिविल अस्पताल में यह जटिल शल्य क्रिया पूरी तरह निःशुल्क संपन्न हुई।

सटीक टीमवर्क और आधुनिक तकनीक का संगम
यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में संपन्न हुआ। ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया विभाग की प्रमुख डॉ. रूहानी ने मरीज की स्थिति पर कड़ी नजर रखी। टीम में शामिल स्टाफ नर्स इरा शर्मा, रितु, अंजली और कुशल के उत्कृष्ट समन्वय ने इस जटिल प्रक्रिया को सुरक्षित बनाया।
“मरीज की हालत अब स्थिर है और वह तेजी से रिकवर कर रही हैं। हमारी प्राथमिकता हमेशा से आम आदमी को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं देना रही है।”
— डॉ. रूहानी, प्रमुख, एनेस्थीसिया विभाग

बदल रही है सरकारी अस्पतालों की तस्वीर
अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अनुपमा शर्मा ने इस सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज नूरपुर सिविल अस्पताल आधुनिक तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों के दम पर किसी भी बड़े निजी संस्थान को टक्कर देने के लिए तैयार है। अब लोगों को गंभीर ऑपरेशनों के लिए महंगे निजी अस्पतालों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है।








