पंजाब निकाय विभाग में ‘लालफीताशाही’ पर प्रहार: ई-निगम लागू, अब 10 दिन में पास होंगे नगर निगमों के प्रस्ताव

चंडीगढ़:पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार के नए स्थानीय निकाय मंत्री संजीव अरोड़ा ने पद संभालते ही विभाग में ‘गवर्नेंस रिफॉर्म’ (शासन सुधार) का बिगुल फूंक दिया है। बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अरोड़ा ने चौंकाने वाले खुलासे करते हुए बताया कि राज्य की विभिन्न नगर निगमों द्वारा पास करके भेजे गए 1100 से ज्यादा प्रस्ताव पिछले कई सालों से विभाग में धूल फांक रहे थे। मंत्री ने दावा किया कि उन्होंने कार्यभार संभालते ही पिछले तीन हफ्तों के भीतर इनमें से 900 प्रस्तावों को क्लियर कर दिया है।
पिछली सरकारों और मंत्रियों पर उठे सवाल
मंत्री अरोड़ा के इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। अरोड़ा ने बताया कि कुछ प्रस्ताव तो 2018 से लंबित पड़े थे। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या पिछले 3 सालों के दौरान ‘आप’ सरकार के ही पुराने मंत्रियों ने इन फाइलों पर ध्यान नहीं दिया? संजीव अरोड़ा ने इन फैसलों को ‘मिशन मोड अर्बन डेवलपमेंट’ का नाम दिया है और संकेत दिया है कि अब पुरानी सुस्ती नहीं चलेगी।

सुधारों के मुख्य बिंदु:
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- 10 दिन की डेडलाइन: अब किसी भी प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए सरकार ने 10 दिन की समय-सीमा तय कर दी है।
- ई-निगम पोर्टल: फाइलों के मैनुअल सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर ऑनलाइन ‘ई-निगम’ सिस्टम लागू कर दिया गया है।
- अधिकारियों की जवाबदेही: टेंडर प्रक्रिया और वर्क ऑर्डर में होने वाली देरी को रोकने के लिए एक ही चीफ इंजीनियर को जिले की सभी ब्रांचों का चार्ज सौंपा गया है।
- वित्तीय शक्तियां बढ़ीं: स्थानीय स्तर पर 2 करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों को अब तकनीकी मंजूरी दी जा सकेगी, जिससे फाइलों को चंडीगढ़ भेजने की जरूरत नहीं होगी।
“प्रस्तावों की मंजूरी में होने वाली देरी ही विकास कार्यों की सबसे बड़ी बाधा थी। हमने सिस्टम को सेंट्रलाइज्ड और टाइम-बाउंड कर दिया है। अब अफसरों की रोजाना मॉनिटरिंग होगी और फाइलों को रोकने वालों की जवाबदेही तय की जाएगी।”
— संजीव अरोड़ा, स्थानीय निकाय मंत्री, पंजाब

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
मंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के लिए टेंडर लगाने या वर्क ऑर्डर जारी करने में अधिकारियों द्वारा की जा रही देरी की पोल अब खुल चुकी है। नए सिस्टम के तहत, यदि कोई फाइल 10 दिन से ज्यादा रुकती है, तो संबंधित अधिकारी को उसका कारण बताना होगा। ई-निगम के माध्यम से जनता भी अपने क्षेत्र के प्रस्तावों की स्थिति को ट्रैक कर सकेगी, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और शहरी विकास को नई गति मिलेगी।








