अकाली दल की बड़ी जीत: बिक्रम मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
‘झूठे मुकदमों और राजनीतिक रंजिश की हार, सच्चाई की जीत’— एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर

नई दिल्ली/चंडीगढ़: माननीय सुप्रीम कोर्ट ने शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है। मजीठिया पिछले सात महीनों से ‘आय से अधिक संपत्ति’ और ड्रग्स से जुड़े मामलों में न्यायिक हिरासत में थे। अदालत के इस फैसले के बाद अकाली दल के खेमे में खुशी की लहर है और इसे सच्चाई की जीत बताया जा रहा है।
सरकार के पास नहीं थे ठोस सबूत
शिरोमणि अकाली दल के मुख्य प्रवक्ता, एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर ने फैसले की जानकारी साझा करते हुए पंजाब की ‘आप’ सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि मजीठिया पर दर्ज मुकदमे पूरी तरह से झूठे और राजनीतिक रंजिश से प्रेरित थे। कलेर ने बताया कि अदालत ने यह माना कि सरकार के पास कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं थे और मामले केवल राजनीतिक दबाव के कारण दर्ज किए गए थे।

मुख्य दलीलें और कानूनी पहलू:
- साढ़े चार साल से अधूरी जांच: कलेर ने कहा कि ड्रग्स केस में साढ़े चार साल बीत जाने के बाद भी पुलिस चालान पेश नहीं कर सकी है।
- बेबुनियाद संपत्ति का मामला: आय से अधिक संपत्ति मामले में भी सरकार के पास कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले।
- स्वतंत्र न्यायपालिका: शिरोमणि अकाली दल ने कहा कि संविधान और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के सामने सरकार की दमनकारी नीतियां टिक नहीं सकीं।
राजनीतिक रंजिश का आरोप
पार्टी के अनुसार, मजीठिया को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे लगातार सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे थे। अकाली दल ने इसे ‘लोकतंत्र की जीत’ बताते हुए कहा कि पंजाब सरकार को अदालत में मुंह की खानी पड़ी है।

”यह फैसला न्यायपालिका में संविधान की अटूट आस्था और सच्चाई की जीत है। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ बिना सबूत के मुकदमा चलाना अन्याय है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने आज स्पष्ट कर दिया।”
— एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर,








