हक की आवाज़: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का हल्लाबोल, पुलिस ने रोका रास्ता
लंबित वेतन, नियमितीकरण और पेंशन की मांग को लेकर प्रदर्शन; विधानसभा में मुद्दा उठाने की मांग

अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को आज भारी पुलिस बल का सामना करना पड़ा। शनिवार को पेंडिंग सैलरी जारी करने, सेवाओं को नियमित करने और अन्य लंबे समय से रुके हुए लाभों की मांग को लेकर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता प्रदर्शन करने इकट्ठा हुए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें निर्धारित स्थल पर पहुंचने से पहले ही रोक दिया और सभा करने की अनुमति नहीं दी।

सालों से उपेक्षा का आरोप
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से अपनी बुनियादी समस्याओं को उठा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन ही मिलते आए हैं। कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगों में शामिल हैं:
- बकाया वेतन: महीनों से रुकी हुई सैलरी का तत्काल भुगतान।
- नियमितीकरण: संविदा और मानदेय प्रथा को खत्म कर सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना।
- मानदेय में वृद्धि: बढ़ती महंगाई के अनुसार सम्मानजनक मानदेय तय करना।
- सामाजिक सुरक्षा: रिटायरमेंट के बाद पेंशन और ग्रेच्युटी के लाभ प्रदान करना।
“विधानसभा में गूंजनी चाहिए हमारी आवाज़”
नारेबाजी कर रहे प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि अब वे कोरे आश्वासनों से मानने वाले नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि उनकी समस्याओं को आगामी विधानसभा सत्र में उठाया जाए ताकि सरकार उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस नीतिगत फैसला ले सके।
कार्यकर्ताओं ने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा, “हम बच्चों के पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य योजनाओं को जमीनी स्तर पर सफल बनाते हैं। सरकार की हर कल्याणकारी योजना का बोझ हमारे कंधों पर है, लेकिन जब हमारे हक की बात आती है, तो हमारे साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है।”

आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार
प्रदर्शन में शामिल कई सहायिकाओं ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि कम वेतन और उसमें भी देरी के कारण उनके परिवारों के सामने गुजारे का संकट खड़ा हो गया है। बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि हजारों वर्कर्स के लिए सम्मान और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सेवाओं का नियमितीकरण अब अनिवार्य हो गया है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी
आंगनवाड़ी संगठन के प्रतिनिधियों ने सरकार को सीधी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यह आंदोलन केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में वे जेल भरो आंदोलन और पूर्ण कार्य बहिष्कार जैसे कड़े कदम उठाएंगे।








