बर्फबारी का डिपुओं पर प्रहार: बिजली और इंटरनेट ठप्प, राशन वितरण के लिए ‘बैकलॉग’ विकल्प की सिफारिश

शिमला: हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों और जनजातीय क्षेत्रों में हुई भारी बर्फबारी ने जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। बर्फबारी का सीधा असर अब प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर भी दिखने लगा है। कई जिलों में विद्युत आपूर्ति बाधित होने और इंटरनेट कनेक्टिविटी में आई गिरावट के कारण राशन डिपुओं में लगी पॉश (POS) मशीनें शो-पीस बनकर रह गई हैं। सर्वर डाउन होने और मशीनों के न चलने से उपभोक्ता ठिठुरती ठंड में डिपुओं से खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।

आयोग की समीक्षा: राशन की कमी नहीं, कनेक्टिविटी है बाधा
राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष डा. एसपी कत्याल ने स्थिति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि प्रदेश के किसी भी डिपो में राशन की कमी नहीं है। जनजातीय और हिमपात प्रभावित क्षेत्रों सहित प्रदेश की सभी उचित मूल्य दुकानों (Fair Price Shops) में पर्याप्त मात्रा में राशन उपलब्ध है।
डा. कत्याल ने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों के लाभार्थियों को पहले ही मार्च माह तक का अग्रिम राशन उठाने की अनुमति दी जा चुकी है। समस्या उन क्षेत्रों में आ रही है जहाँ मासिक आधार पर वितरण होता है और खराब मौसम ने डिजिटल प्रक्रिया को बाधित कर दिया है।

‘बैकलॉग’ वितरण विकल्प होगा सक्रिय
मौजूदा संकट को देखते हुए राज्य खाद्य आयोग ने सरकार से एक महत्वपूर्ण सिफारिश की है। आयोग ने ‘बैकलॉग’ वितरण विकल्प को तत्काल प्रभाव से सक्रिय करने का सुझाव दिया है। इस विकल्प के शुरू होने से:
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- बिजली या इंटरनेट न होने की स्थिति में भी लाभार्थियों को राशन दिया जा सकेगा।
- समयबद्ध तरीके से वितरण प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
- आपातकालीन परिस्थितियों में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
“हमने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में बिजली और कनेक्टिविटी से प्रभावित डिपुओं की पहचान कर तुरंत रिपोर्ट भेजें। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र व्यक्ति राशन से वंचित न रहे।” > — डा. एसपी कत्याल, अध्यक्ष, राज्य खाद्य आयोग

जिला अधिकारियों को सख्त निर्देश
आयोग ने सभी जिलों के अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं कि वे प्रभावित क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा जल्द से जल्द आयोग को सौंपें। साथ ही, यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बैकलॉग वितरण को वैज्ञानिक और समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए ताकि भविष्य में भी ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जनता को परेशानी न हो।








