यूजीसी इक्विटी प्रमोशन बिल के खिलाफ जम्मू में बढ़ा आक्रोश: युवा राजपूत सभा ने केंद्र के खिलाफ खोला मोर्चा
6 फरवरी को महाराजा हरि सिंह की प्रतिमा के समक्ष होगा विशाल प्रदर्शन; सभा ने बिल को बताया सामाजिक संतुलन के लिए खतरा

केंद्र सरकार द्वारा देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू किए गए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विधेयक, 2026 को लेकर जम्मू-कश्मीर में विरोध की लहर तेज हो गई है। जम्मू की प्रमुख सामाजिक संस्था युवा राजपूत सभा (YRS) ने इस बिल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को सीधी चेतावनी दी है।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
युवा राजपूत सभा का आरोप है कि 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित की गई नई नियमावली शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता और सामाजिक ताने-बाने के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। सभा के पदाधिकारियों के अनुसार, इस बिल के प्रावधानों में सभी वर्गों के हितों का ध्यान नहीं रखा गया है, जिससे भविष्य में छात्रों के बीच मतभेद और सामाजिक असंतुलन पैदा होने की आशंका है।

6 फरवरी को शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
विरोध को धरातल पर उतारने के लिए सभा ने 6 फरवरी 2026 को जम्मू के केंद्र बिंदु महाराजा हरि सिंह की प्रतिमा के नीचे एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया है। सभा के प्रधान ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा:
“सरकार को कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों और समुदायों से संवाद करना चाहिए था। यह बिल एकतरफा निर्णय की तरह लग रहा है। हम चुप नहीं बैठेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे।”

युवाओं से एकजुट होने की अपील
सभा ने जम्मू संभाग के युवाओं और छात्र संगठनों से आह्वान किया है कि वे इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल हों। इस ऐलान के बाद न केवल जम्मू की राजनीति गर्मा गई है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासन भी सतर्क हो गया है। जानकारों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर संवाद की पहल नहीं की, तो आने वाले दिनों में यह विरोध प्रदर्शन अन्य क्षेत्रों में भी फैल सकता है।

प्रमुख आपत्तियां:
- संवाद का अभाव: बिल को बिना किसी व्यापक सार्वजनिक चर्चा के लागू करना।
- सामाजिक प्रभाव: नियमावली से शैक्षणिक और सामाजिक संतुलन बिगड़ने का डर।
- पुनर्विचार की मांग: बिल की समीक्षा कर संशोधन करने की अपील।








