पंजाबी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कमाल: अब सी.टी. स्कैन में अंगों की पहचान होगी और भी सटीक

पंजाबी यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने मेडिकल इमेजिंग के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है। यह तकनीक विशेष रूप से पेट (Abdomen) के सी.टी. स्कैन चित्रों में मानव अंगों की पहचान करने की शुद्धता (Accuracy) में भारी सुधार करेगी। इस नवाचार से रेडियोलॉजिस्टों को गंभीर बीमारियों के निदान और जीवन रक्षक फैसले लेने में बड़ी मदद मिलेगी।
शोध टीम और नेतृत्व
यह गौरवशाली शोध डॉ. नवजोत कौर और डॉ. निर्वैर नीरू के कुशल मार्गदर्शन में शोधार्थी डॉ. हरिंदर कौर द्वारा संपन्न किया गया है। शोध का मुख्य विषय ‘पेट के सी.टी. स्कैन चित्रों के माध्यम से एक से अधिक अंगों की पहचान’ (Multi-organ Segmentation) रहा है।
क्या है नई तकनीक?
अक्सर जटिल सी.टी. स्कैन में अंगों की सीमाओं (Boundaries) को स्पष्ट रूप से पहचानना चुनौतीपूर्ण होता है। डॉ. हरिंदर कौर ने बताया कि इस समस्या को हल करने के लिए एक दो-चरणीय विधि (Two-Phase Method) विकसित की गई है:
- प्रथम चरण: इसमें ‘वेटेड ग्रे वुल्फ ऑप्टिमाइजेशन’ (Weighted GWO) एल्गोरिद्म का प्रयोग किया गया है। यह तकनीक अंगों (यकृत, एओरटा और प्लीहा आदि) के सूक्ष्म आकार को सुरक्षित रखते हुए चित्र के कंट्रास्ट को बढ़ा देती है।
- द्वितीय चरण: यहाँ ‘एक्स-डेंसनेट‘ (X-DenseNet) आर्किटेक्चर का उपयोग किया गया है। यह सिस्टम को अंगों की आंतरिक विशेषताओं को बारीकी से समझने में मदद करता है, जिससे परिणाम अत्यंत सटीक आते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना
डॉ. नवजोत कौर के अनुसार, इस तकनीक का परीक्षण अंतरराष्ट्रीय मानक डेटासेट्स (FLARE 22 और BTCV) पर किया गया। परिणामों में एओरटा (Aorta) की पहचान में 0.9938 और प्लीहा (Spleen) की पहचान में 0.9833 का शानदार स्कोर प्राप्त हुआ, जो वर्तमान में उपलब्ध ‘डिफ्यूजन मॉडल’ से भी बेहतर है।
डॉ. निर्वैर नीरू ने जानकारी दी कि यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘डिस्प्लेज़’ (Elsevier, SCI-Indexed) और कई आई.ई.ई.ई. (IEEE) सम्मेलनों में प्रकाशित हो चुका है।

उप-कुलपति ने दी बधाई
यूनिवर्सिटी के उप-कुलपति डॉ. जगदीप सिंह ने शोध टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह गर्व का विषय है कि यूनिवर्सिटी मेडिकल ए.आई. जैसे आधुनिक क्षेत्रों में नेतृत्व कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाबी यूनिवर्सिटी ऐसे शोधों के लिए प्रतिबद्ध है जिनका सीधा लाभ समाज और स्वास्थ्य क्षेत्र को मिल सके।

खास बातें:
- जटिल सी.टी. स्कैन में अंगों की सीमाओं की पहचान होगी आसान।
- ’वेटेड ग्रे वुल्फ ऑप्टिमाइजेशन’ और ‘एक्स-डेंसनेट’ तकनीक का हुआ प्रयोग।
- रेडियोलॉजिस्टों को तेज़ी से और सटीक निर्णय लेने में मिलेगी सहायता।
- अंतरराष्ट्रीय मानक डेटासेट्स पर मौजूदा मॉडलों को पछाड़ा।








