77वां गणतंत्र दिवस: राष्ट्रभक्ति और वैश्विक मैत्री का संगम

आज पूरा देश गर्व और उल्लास के साथ 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 26 जनवरी 1950 को ही भारत का संविधान लागू हुआ था और हमारा देश एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना था। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तिरंगा फहराया, तो 21 तोपों की सलामी के साथ पूरा आसमान ‘जय हिंद’ के नारों से गूंज उठा। इस वर्ष का समारोह न केवल भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक रहा, बल्कि यह ‘वंदे मातरम्’ के 150 गौरवशाली वर्षों को समर्पित एक ऐतिहासिक क्षण भी बना।
मुख्य अतिथि और कूटनीतिक संदेश
इस वर्ष गणतंत्र दिवस के समारोह में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनकी उपस्थिति भारत और यूरोप के प्रगाढ़ होते संबंधों और ‘विश्व मित्र’ के रूप में उभरते भारत की छवि को दर्शाती है।
समारोह के मुख्य आकर्षण
वंदे मातरम् थीम: इस बार की परेड का मुख्य आकर्षण ‘वंदे मातरम्’ की थीम रही। परेड के दौरान 1923 के ऐतिहासिक ‘वंदे मातरम् एल्बम’ की पेंटिंग्स को प्रदर्शित किया गया, जो भारत की स्वतंत्रता यात्रा को जीवंत कर रही थीं।
आत्मनिर्भर भारत की झांकी: कर्तव्य पथ पर कुल 30 झांकियां निकाली गईं। इनमें ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ और ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ के जरिए देश की बढ़ती आर्थिक और तकनीकी शक्ति को दिखाया गया।
शक्ति प्रदर्शन: स्वदेशी रक्षा उपकरणों का प्रदर्शन इस बार भी केंद्र में रहा। ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, आकाश वेपन सिस्टम और स्वदेशी तौर पर विकसित रॉकेट लॉन्चर ‘सूर्यास्त्र’ ने दुनिया को भारत की रक्षा क्षमता का लोहा मनवाया।
नारी शक्ति: विभिन्न सैन्य और अर्धसैनिक टुकड़ियों का नेतृत्व महिलाओं ने किया, जो बदलते और आधुनिक भारत की सशक्त तस्वीर पेश कर रहा था।
वायुसेना का ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन
परेड का समापन वायुसेना के भव्य ‘फ्लाईपास्ट’ के साथ हुआ। इसमें 29 विमानों ने हिस्सा लिया, जिसमें राफेल और सुखोई-30 जैसे लड़ाकू विमानों ने आसमान में ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन बनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह फॉर्मेशन पिछले वर्ष के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की यादों और भारतीय वायुसेना के साहस को समर्पित था।
प्रधानमंत्री का शहीदों को नमन
समारोह की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल वार मेमोरियल (राष्ट्रीय समर स्मारक) जाकर देश के वीर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन हमें हमारे संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति समर्पित होने और 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के संकल्प की याद दिलाता है।
- अंतरराष्ट्रीय महत्व: इस वर्ष भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण यह है कि यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेता—यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन—समारोह के मुख्य अतिथि हैं। यह भारत-यूरोपीय संघ के बीच मजबूत होते व्यापारिक और रणनीतिक रिश्तों को दर्शाता है।
- विशेष थीम: इस साल की गणतंत्र दिवस परेड ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को समर्पित है। कर्तव्य पथ पर भारत की सैन्य शक्ति के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक विविधता की झांकियां दुनिया को “लोकतंत्र की जननी” (Mother of Democracy) का संदेश दे रही हैं।

धार्मिक दृष्टि: 76 साल बाद बना अद्भुत संयोग
धार्मिक और ज्योतिषीय नजरिए से 26 जनवरी 2026 की तिथि किसी चमत्कार से कम नहीं है। ज्योतिषविदों के अनुसार, आज एक ऐसा दुर्लभ संयोग बना है जो ठीक वैसा ही है जैसा 1950 में पहले गणतंत्र दिवस के दिन था।
- वही तिथि, वही नक्षत्र: 26 जनवरी 1950 को जब संविधान लागू हुआ था, तब हिंदी पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी। ठीक 76 साल बाद आज फिर 26 जनवरी को माघ शुक्ल अष्टमी का ही संयोग है। इसे राष्ट्र के भाग्य के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है।
- भीष्म अष्टमी: आज भीष्म अष्टमी का पावन पर्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आज ही के दिन ‘इच्छा मृत्यु’ का वरदान प्राप्त पितामह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर अपने प्राण त्यागे थे। इस दिन तर्पण और दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- माघ गुप्त नवरात्रि: आज गुप्त नवरात्रि की अष्टमी भी है, जिसे ‘मासिक दुर्गाष्टमी’ के रूप में पूजा जाता है। शक्ति की उपासना के लिए यह दिन अत्यंत ऊर्जावान माना गया है।

आज का पंचांग (26 जनवरी 2026, सोमवार)
आज का पंचांग कर्म और अध्यात्म के बीच संतुलन बनाने का संकेत दे रहा है:
सामान्य विवरण
- दिन: सोमवार
- दिनांक: 26 जनवरी 2026
- संवत: विक्रम संवत 2082 (नल), शक संवत 1947 (क्रोधन)
- मास: माघ, शुक्ल पक्ष
- विशेष पर्व: गणतंत्र दिवस, भीष्म अष्टमी, मासिक दुर्गाष्टमी
- तिथि और नक्षत्र
- तिथि: अष्टमी (रात 09:18 तक), उसके बाद नवमी प्रारंभ।
- नक्षत्र: अश्विनी (दोपहर 12:32 तक), उसके बाद भरणी।
- योग: साध्य (सुबह 09:11 तक), उसके बाद शुभ।
- करण: विष्टि/भद्रा (सुबह 10:17 तक), उसके बाद बव।
- सूर्य और चंद्र गणना
- सूर्योदय: सुबह 07:12 बजे
- सूर्यास्त: शाम 05:55 बजे
- चन्द्रोदय: सुबह 11:30 बजे
- चन्द्रास्त: रात 01:29 बजे (27 जनवरी)
- चंद्र राशि: मेष
- शुभ मुहूर्त (In Auspicious Time)
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:12 से 12:54 तक।
- अमृत काल: सुबह 06:37 से 08:08 तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:20 से 03:03 तक।
- अशुभ समय (Inauspicious Time)
- राहुकाल: सुबह 08:33 से 09:53 तक।
- यमगण्ड: सुबह 11:13 से दोपहर 12:33 तक।
- गुलिक काल: दोपहर 01:52 से 03:12 तक।
- भद्रा: सुबह 07:12 से 10:17 तक।
- आज की दिशाशूल
- सोमवार को पूर्व दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता (दिशाशूल)। यदि यात्रा आवश्यक हो, तो घर से दर्पण देखकर या थोड़ा दूध पीकर निकलना शुभ होता है।
आज का दिन स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अपनी संवैधानिक शक्ति और अपनी प्राचीन आध्यात्मिक जड़ों, दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।









