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23 जनवरी 2026: आज का खास दिन

ऋतुराज के आगमन का पर्व: ज्ञान, कला और उमंग की त्रिवेणी है बसंत पंचमी

प्रकृति जब अपनी पुरानी चादर छोड़कर नव-श्रृंगार करती है, जब खेतों में सरसों के पीले फूल लहराने लगते हैं और हवाओं में एक नई खनक महसूस होती है, तब समझ लीजिए कि ऋतुराज बसंत का आगमन हो चुका है। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाने वाला यह पर्व केवल मौसम के बदलाव का प्रतीक नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का उत्सव है।

विद्या की देवी का अवतरण

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी के मुख से विद्या, बुद्धि और संगीत की देवी माँ सरस्वती प्रकट हुई थीं। इसीलिए इस दिन को ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है। शिक्षण संस्थानों में कलम, पुस्तक और वाद्य यंत्रों की पूजा की जाती है। छोटे बच्चों के लिए यह दिन ‘अक्षर आरम्भ’ (विद्यारंभ संस्कार) के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

पीला रंग: समृद्धि और ऊर्जा का प्रतीक

​बसंत पंचमी पर चारों ओर पीले रंग की धूम रहती है। पीला रंग शुद्धता, सादगी और नई ऊर्जा का प्रतीक है।

  • पकवान: घरों में केसरिया भात, पीली खिचड़ी और बेसन के लड्डू बनाए जाते हैं।
  • परिधान: इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनकर खुशियाँ मनाते हैं।
  • प्रकृति: खेतों में खिली सरसों की पीली चादर धरती के यौवन को दर्शाती है।

बदलता स्वरूप और पर्यावरण की पुकार

​आज के आधुनिक दौर में, जहाँ हम डिजिटल शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं, बसंत पंचमी हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने का संदेश देती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रगति के साथ-साथ प्रकृति का सम्मान करना भी अनिवार्य है। पतंगबाजी के शौकीनों के लिए यह दिन उत्साह से भरा होता है, लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमारे उल्लास से परिंदों को नुकसान न पहुँचे।

निष्कर्ष:

बसंत पंचमी जीवन में आलस्य को त्याग कर नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का उत्सव है। आइए, इस अवसर पर हम अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश को फैलाने का संकल्प लें।

“या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता…”

समस्त पाठकों को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ

पराक्रम दिवस और बसंत पंचमी का अद्भुत संयोग

​आज 23 जनवरी 2026 का दिन भारतीय कैलेंडर और इतिहास के पन्नों में एक अत्यंत दुर्लभ और ऊर्जावान संयोग लेकर आया है। आज जहां पूरा देश ‘आजाद हिंद फौज’ के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मना रहा है, वहीं धार्मिक दृष्टि से आज विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना का महापर्व ‘बसंत पंचमी’ भी है।

​शौर्य और ज्ञान का यह मिलन आज के दिन को राष्ट्रीय और आध्यात्मिक, दोनों स्तरों पर विशिष्ट बनाता है।

राष्ट्रीय महत्व: नेताजी की 129वीं जयंती (पराक्रम दिवस)

​23 जनवरी 1897 को कटक में जन्मे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सम्मान में भारत सरकार इस दिन को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाती है।

  • प्रेरणा का दिन: नेताजी का नारा “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” आज भी युवाओं में राष्ट्रप्रेम का संचार करता है।
  • आयोजन: आज के दिन सैन्य प्रदर्शनियों, शिक्षण संस्थानों में व्याख्यान और नेताजी के जीवन पर आधारित कार्यक्रमों के जरिए उनकी वीरता को याद किया जा रहा है।
  • अंतरराष्ट्रीय दृष्टि: नेताजी का वैश्विक दृष्टिकोण और विदेशी ताकतों के साथ मिलकर भारत की स्वतंत्रता की रणनीति आज भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों के लिए शोध का विषय है।

धार्मिक दृष्टि: बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा

​आज माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन ही ज्ञान, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था।

  • ऋतुराज का आगमन: आज से ही प्रकृति में बसंत ऋतु का औपचारिक आगमन माना जाता है। खेतों में सरसों के पीले फूल और प्रकृति का नया श्रृंगार मन को मोह लेता है।
  • विद्यारंभ संस्कार: छोटे बच्चों के अक्षर ज्ञान (पाटी पूजन) के लिए आज का दिन सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
  • पीले रंग का महत्व: आज के दिन पीले वस्त्र पहनना, पीले पकवान बनाना और मां सरस्वती को पीले पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि पीला रंग उत्साह और ज्ञान का प्रतीक है।

क्या कहता है आज का पंचांग?

​आज का पंचांग ग्रहों की स्थिति के अनुसार कार्यों की सिद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है:

  • तिथि: माघ शुक्ल पक्ष पंचमी (बसंत पंचमी)।
  • नक्षत्र: आज उत्तराभाद्रपद नक्षत्र रहेगा, जो स्थिरता और शुभता प्रदान करने वाला है।
  • योग: आज ‘शिव’ योग का निर्माण हो रहा है, जो साधना और मंत्र सिद्धि के लिए उत्तम है।
  • अबूझ मुहूर्त: बसंत पंचमी को ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है। यानी आज के दिन बिना मुहूर्त देखे विवाह, गृह प्रवेश या नया व्यापार शुरू करना अत्यंत मंगलकारी होता है।

आज का विशेष संयोग

​23 जनवरी 2026 को पराक्रम और प्रज्ञा (ज्ञान) का संगम है। एक ओर नेताजी का साहस हमें अपनी सीमाओं और अधिकारों की रक्षा करना सिखाता है, तो दूसरी ओर मां सरस्वती का आशीर्वाद हमें विवेकशील बनाता है। आज का दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि संकल्प लेने का है—देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने और ज्ञान के प्रकाश से अंधकार को मिटाने का।

Ami News
Author: Ami News

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