मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना: ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के सपनों को लगी पंख, भारत भ्रमण से लौटे बच्चों ने साझा किए अनुभव

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज अपने आधिकारिक निवास ‘ओक ओवर’ में उन बच्चों से मुलाकात की, जो हाल ही में एक विशेष भारत भ्रमण से लौटे हैं। इन बच्चों को राज्य सरकार ने ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा दिया है। मुलाकात के दौरान बच्चों के चेहरे की खुशी और उनके द्वारा साझा किए गए अनुभव मुख्यमंत्री की उस दूरगामी सोच को दर्शा रहे थे, जिसके तहत ‘मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना’ शुरू की गई है।

”गोवा का समंदर और हवाई यात्रा हमेशा रहेगी याद”
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री एक अभिभावक की तरह बच्चों से घुले-मिले। उन्होंने बच्चों से बड़े स्नेह के साथ उनकी यात्रा के बारे में पूछा—”गोवा में कितने दिन रहे? क्रूज की सैर कैसी रही? हवाई जहाज में बैठने का अनुभव कैसा था और बोर्डिंग पास कैसे बनता है?”
बच्चों ने उत्साहपूर्वक बताया कि आगरा के ताजमहल से लेकर गोवा के समंदर तक की यह यात्रा उनके लिए जीवन का सबसे यादगार अनुभव है। मुख्यमंत्री ने बच्चों से आग्रह किया कि वे इन अनुभवों को केवल मनोरंजन न समझें, बल्कि इन्हें जीवन के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में अपनाएं।

मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना: केवल संरक्षण नहीं, बेहतर भविष्य का वादा
सीएम सुक्खू ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इन बच्चों को केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर भी प्रदान कर रही है। उन्होंने महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:
- उच्च शिक्षा का खर्च: 12वीं के बाद बच्चों की कोचिंग और उच्च शिक्षा का पूरा खर्च सरकार उठाएगी।
- सम्पदा पर अधिकार: मुख्यमंत्री ने कहा, “हिमाचल की सम्पदा पर इन बच्चों का भी समान अधिकार है और सरकार इस सम्पदा का उपयोग वंचित वर्ग के कल्याण के लिए कर रही है।”
- सर्वांगीण विकास: यात्रा का मुख्य उद्देश्य बच्चों को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक बुनियादी ढांचे से परिचित करवाना था।
‘सपनों की उड़ान’ पुस्तिका का विमोचन
इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों की इस यात्रा पर आधारित एक विशेष पुस्तिका ‘सपनों की उड़ान’ का विमोचन भी किया। साथ ही, बच्चों के भारत भ्रमण पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र (Documentary) भी दिखाया गया।

मुख्य बिंदु:
- रवानगी: 6 जनवरी को शिमला से रवाना हुए थे बच्चे।
- प्रतिभागी: सराहन, टूटीकंडी और मशोबरा के संस्थानों से कुल 52 बच्चे।
- गंतव्य: देश के विभिन्न प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल।








