सावधान! पैरों का दर्द हो सकता है हार्ट अटैक का संकेत, सर्दियों में बढ़ जाता है ‘PAD’ का खतरा

सर्दियों का मौसम आते ही हृदय रोगों (Heart Diseases) का ग्राफ तेजी से बढ़ने लगता है। आमतौर पर छाती में दर्द या भारीपन को ही दिल के दौरे का शुरुआती लक्षण माना जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक नई चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, आपके पैरों की नसों में होने वाली समस्या भी भविष्य में आने वाले हार्ट अटैक या स्ट्रोक का बड़ा इशारा हो सकती है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को पेरिफरल आर्टरी डिजीज (PAD) कहा जाता है।

क्या है पेरिफरल आर्टरी डिजीज (PAD)?
पेरिफरल आर्टरी डिजीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें पैरों की धमनियों (Arteries) में कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाता है, जिससे वहां सूजन और ब्लॉकेज पैदा होती है। जब नसों में यह रुकावट आती है, तो पैरों तक खून का बहाव सही तरीके से नहीं हो पाता।

डॉ. के अनुसार, “पैरों में होने वाला यह ब्लॉकेज केवल वहीं तक सीमित नहीं रहता। यह संकेत है कि शरीर की अन्य धमनियों में भी रुकावट आ रही है। यदि पैरों की नसों में क्लॉट या ब्लॉकेज है, तो यह दिल की धमनियों को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।”
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
PAD के लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य थकान या बढ़ती उम्र का असर समझकर छोड़ देते हैं, जो घातक हो सकता है। प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
- पैरों में ऐंठन: चलते समय या सीढ़ियां चढ़ते समय पैरों में तेज दर्द या खिंचाव महसूस होना।
- रंग में बदलाव: पैरों का रंग नीला या हल्का बैंगनी पड़ जाना।
- तापमान और संवेदनशीलता: पैरों में लगातार ठंडक महसूस होना या सुन्नपन छा जाना।
- सूजन: पैरों, टखनों या पंजों में अकारण सूजन आना।
- त्वचा और नाखून: पैरों की त्वचा का रूखा व खुरदरा होना और नाखूनों का पीला या मोटा हो जाना।

क्यों बढ़ जाता है खतरा? (जोखिम के कारक)
डॉक्टरों के अनुसार, यह बीमारी हर किसी को समान रूप से प्रभावित नहीं करती, लेकिन कुछ स्थितियां इसे और गंभीर बना देती हैं:
- मोटापा: शरीर का अधिक वजन नसों पर दबाव डालता है।
- हाई ब्लड प्रेशर: उच्च रक्तचाप धमनियों की दीवारों को नुकसान पहुँचाता है।
- सुस्त जीवनशैली: शारीरिक गतिविधि की कमी कोलेस्ट्रॉल जमा होने का मुख्य कारण है।
बचाव के लिए अपनाएं ये 4 मंत्र
दिल और पैरों की सेहत को बरकरार रखने के लिए विशेषज्ञ ये सलाह देते हैं:
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- सक्रिय रहें: रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या हल्का व्यायाम करें।
- खान-पान पर नियंत्रण: डाइट में ज्यादा फैट, मैदा और रेड मीट से परहेज करें। संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
- तनाव प्रबंधन: मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें, क्योंकि तनाव सीधे तौर पर दिल की धड़कन और नसों को प्रभावित करता है।
- सतर्कता: पैरों में सूजन या सुन्नपन जैसे किसी भी लक्षण को हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।

विशेषज्ञ की सलाह: “सर्दियों में नसें सिकुड़ती हैं, जिससे ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में शरीर के निचले हिस्से में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव के प्रति सजग रहना ही बचाव की पहली सीढ़ी है।”








