मजीठिया की सुरक्षा में चूक हुई तो नपेंगे जेल अधीक्षक और ADGP: हाई कोर्ट

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने नाभा जेल में बंद शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि मजीठिया की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी ADGP (जेल) और नाभा जेल के अधीक्षक (Superintendent) की होगी।

खुफिया रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
सुनवाई के दौरान मजीठिया के वकील ने ADGP इंटेलिजेंस के एक हालिया पत्र का हवाला दिया। इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि मजीठिया को जेल के भीतर एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन (बब्बर खालसा इंटरनेशनल – BKI) से जान का गंभीर खतरा है। अदालत ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे ‘अर्जेंट लिस्ट’ के तुरंत बाद सबसे पहले सुना।

सरकार ने स्वीकारी धमकी की बात
पंजाब सरकार ने अदालत के समक्ष माना कि मजीठिया को वास्तव में धमकियां मिली हैं। सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट में बताया गया कि:
- मजीठिया की सुरक्षा को जेल के अंदर और बाहर अत्यधिक सख्त कर दिया गया है।
- वह 24 घंटे CCTV कैमरों की निगरानी में हैं।
- जेल के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
जिम्मेदारी तय, रिपोर्ट तलब
हाई कोर्ट ने DIG, ADGP और जेल अधीक्षक की रिपोर्ट देखने के बाद निर्देश दिया कि सुरक्षा की पूरी जवाबदेही अब इन अधिकारियों की होगी। अदालत ने साफ कर दिया कि किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्य बिंदु:
- अदालत का रुख: सुरक्षा में चूक होने पर सीधे तौर पर जेल प्रशासन और उच्च अधिकारियों पर गाज गिरेगी।
- खतरे का स्रोत: प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जेल के भीतर हमले की आशंका।
- वर्तमान स्थिति: नाभा जेल में हाई-अलर्ट, सीसीटीवी और बाहरी सुरक्षा
- चाक-चौबंद।









