‘चांदनी’ जो सितारों से भी ज्यादा चमकती थी…
बॉलीवुड की पहली फीमेल सुपरस्टार: जब हीरो से ज्यादा फीस लेती थीं श्रीदेवी, लेकिन ताउम्र रहा एक बात का मलाल

मुंबई: फिल्मी दुनिया में खूबसूरती की मिसालें तो बहुत दी जाती हैं, लेकिन एक चेहरा ऐसा था जिसने न केवल अपनी आंखों की जादूगरी से दर्शकों को सम्मोहित किया, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के समीकरण ही बदल दिए। हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड की पहली ‘फीमेल सुपरस्टार’ श्रीदेवी की।
श्रीदेवी सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं थीं, वह एक युग थीं। एक दौर ऐसा था जब फिल्मों का हिट होना हीरो के नाम से नहीं, बल्कि श्रीदेवी की मौजूदगी से तय होता था।

निर्माताओं की पहली पसंद और ‘मुंहमांगी’ फीस
श्रीदेवी की खूबसूरती और उनके टैलेंट का आलम यह था कि उस दौर के बड़े-बड़े फिल्ममेकर्स उन पर दिल हार बैठते थे। हर निर्माता चाहता था कि उनकी फिल्म में श्रीदेवी हों। उनके स्टारडम का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि वह इंडस्ट्री की पहली ऐसी अभिनेत्री बनीं, जिन्होंने मेल एक्टर्स (हीरोज) से ज्यादा फीस वसूलना शुरू किया था।

कहा जाता है कि निर्माता बोनी कपूर तो उनकी खूबसूरती और अभिनय के इस कदर कायल थे कि फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ के लिए उन्होंने श्रीदेवी को उनकी मांग से भी कहीं ज्यादा फीस देकर साइन किया था। बोनी कपूर ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि वह श्रीदेवी के करीब आने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहते थे।
पढ़ाई न कर पाने का ताउम्र रहा अफसोस

चकाचौंध भरी इस दुनिया में भले ही श्रीदेवी ने शोहरत के शिखर को छुआ, लेकिन उनके दिल के एक कोने में हमेशा एक कसक बाकी रही। चार साल की नन्हीं उम्र से कैमरे का सामना करने वाली श्रीदेवी का बचपन सेट पर ही बीता।
लगातार फिल्मों की शूटिंग और व्यस्तता के कारण वह अपनी स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पाईं। उनके करीबियों की मानें तो श्रीदेवी को अपनी पढ़ाई अधूरी रहने का मलाल ताउम्र रहा। यही वजह थी कि उन्होंने अपनी दोनों बेटियों, जाह्नवी और खुशी की शिक्षा को लेकर कभी समझौता नहीं किया और उन्हें बेहतरीन तालीम दिलवाई।

साउथ से बॉलीवुड तक का सुनहरा सफर
श्रीदेवी ने न केवल बॉलीवुड बल्कि तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ सिनेमा में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गजों से लेकर बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन तक, हर बड़े सुपरस्टार के साथ काम किया। उनकी कॉमेडी टाइमिंग, डांस और इमोशनल सीन करने की कला उन्हें अन्य अभिनेत्रियों से मीलों आगे खड़ा करती थी।
“स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी का मतलब था—पर्दे पर जादू। उन्होंने साबित किया कि एक महिला अपने दम पर फिल्म को ब्लॉकबस्टर बना सकती है।”
श्रीदेवी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी ‘हिम्मतवाला’, ‘चांदनी’, ‘सदमा’, ‘चालबाज’ और ‘इंग्लिश विंग्लिश’ जैसी फिल्में आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में उनकी यादें ताजा रखती हैं।








