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सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति पर मुहर, ₹40 से ₹70 हजार मिलेगा वेतन

लंबित राजस्व मामलों को निपटाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला; पटवारी-कानूनगो महासंघ ने खोला मोर्चा

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश में लंबित पड़े हजारों राजस्व मामलों के त्वरित निपटारे के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सेवानिवृत्त पटवारियों, कानूनगो, नायब तहसीलदारों और तहसीलदारों को पुनर्नियुक्ति (Re-employment) देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही सरकार ने इन अधिकारियों के लिए मासिक मानदेय भी तय कर दिया है, जो 40 हजार से लेकर 70 हजार रुपये तक होगा।

पदवार तय किया गया वेतन

​सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, पुनर्नियुक्त होने वाले अधिकारियों को बिना किसी वार्षिक वृद्धि या अतिरिक्त जिम्मेदारी के एक निश्चित मासिक वेतन दिया जाएगा:

  • तहसीलदार: ₹70,000 प्रति माह
  • नायब तहसीलदार: ₹60,000 प्रति माह
  • कानूनगो: ₹50,000 प्रति माह
  • पटवारी: ₹40,000 प्रति माह

संयुक्त महासंघ ने जताया कड़ा विरोध

​सरकार के इस फैसले के खिलाफ हिमाचल प्रदेश पटवारी एवं कानूनगो संयुक्त महासंघ ने मोर्चा खोल दिया है। महासंघ ने इस निर्णय को सेवारत कर्मचारियों के साथ ‘अन्याय’ करार दिया है। संघ का तर्क है कि:

  1. पदोन्नति पर असर: सेवानिवृत्त तहसीलदारों की नियुक्ति से वर्तमान कानूनगो की पदोन्नति रुक जाएगी, जिससे कई कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही रिटायर हो जाएंगे।
  2. मनोबल में गिरावट: वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर करने के बजाय सेवानिवृत्त लोगों को भारी वेतन पर रखना नियमित कर्मचारियों का मनोबल तोड़ने वाला है।
  3. नियमित भर्ती की मांग: संघ ने मांग की है कि सरकार पुनर्नियुक्ति के बजाय खाली पदों पर नियमित भर्तियां करे।

66 हजार मामले अभी भी लंबित

​प्रदेश सरकार ने सत्ता संभालते ही राजस्व विभाग में सुधार के लिए विशेष अदालतें और ऑनलाइन सेवाओं जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन बोझ कम नहीं हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार:

    • ​वर्तमान में प्रदेश में 66,000 से अधिक राजस्व मामले लंबित हैं।
    • ​इन मामलों के निपटारे की गति बढ़ाने के लिए ही सरकार ने अनुभवी सेवानिवृत्त अधिकारियों की सेवाएं लेने का फैसला किया है।
    • ​इन अधिकारियों को आवश्यकता के आधार पर विभिन्न जिलों में तैनात किया जाएगा।

​”सरकार का लक्ष्य आम जनता को राहत देना है, लेकिन नियमित कर्मचारियों की अनदेखी और पदोन्नति के रास्तों को बंद करना स्वीकार्य नहीं है।” — प्रवक्ता, पटवारी एवं कानूनगो संयुक्त महासंघ

Ami News
Author: Ami News

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