अवैध माइनिंग पर मेहरबान सिस्टम: पुलिस व माइनिंग विभाग ने साधी चुप्पी

नूरपुर/पठानकोट:हिमाचल प्रदेश में नए साल का आगाज भले ही नई उम्मीदों के साथ हुआ हो, लेकिन नूरपुर क्षेत्र के सीमावर्ती इलाकों में कानून की धज्जियां सरेआम उड़ती नजर आ रही हैं। एक ओर सरकार अवैध खनन पर जीरो टॉलरेंस की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर चक्की खड्ड का सीना दिन-दिहाड़े छलनी किया जा रहा है।

दिन के उजाले में चल रहा ‘खेल’
नूरपुर के बाड़ी खड्ड, ब्राह्मण दा नाल, लोधवां और टिपरी जैसे क्षेत्रों में अवैध माइनिंग का काला खेल धड़ल्ले से जारी है। आलम यह है कि बड़ी-बड़ी मशीनें और टिप्पर बिना किसी डर के खड्डों में उतर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है, फिर भी माइनिंग और पुलिस विभाग मौन साधे हुए हैं।

पर्यावरण और भविष्य पर संकट
अवैध खनन के कारण न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि भविष्य में बाढ़ और भूस्खलन (Landslides) का खतरा भी बढ़ गया है।
- पुलों पर खतरा: पिछले मानसून में आई बाढ़ से कई पुल टूट चुके हैं और कई गिरने की कगार पर हैं।
- रेलवे ठप: पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे लाइन और जम्मू को जोड़ने वाली मुख्य लाइन पर रेल यातायात कई दिनों तक बाधित रहा, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ा।

आवासीय कॉलोनियों को खतरा
अवैध क्रशरों की वजह से पठानकोट के साथ लगते लोधवां, टिपरी और बाड़ी खड्ड क्षेत्र में स्थित डिफेंस कॉलोनी, आधुनिक विहार और जॉन होटल के आसपास का इलाका भूस्खलन की जद में आ रहा है। इससे एयरपोर्ट रोड और एमएच (MH) की बाउंड्री वॉल को भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

कथनी और करनी में अंतर
नूरपुर के एसपी कुलभूषण वर्मा ने कार्यभार संभालते समय प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि अवैध खनन पर लगाम लगाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। लेकिन वर्तमान स्थिति उनके दावों के विपरीत नजर आ रही है। जब इस मुद्दे पर एसपी से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
बड़ा सवाल: आखिर माइनिंग विभाग और पुलिस प्रशासन की ऐसी क्या मजबूरी है कि वे दिन-रात हो रहे इस अवैध कारोबार को रोकने में असमर्थ हैं? यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र को किसी बड़े हादसे से कोई नहीं बचा पाएगा।








