आपदा के बाद अब ‘बेला ठाकरा’ पर माफिया का प्रहार, प्रशासन की नाक के नीचे सरेआम अवैध खनन

इन्दौरा (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में आई प्राकृतिक आपदा ने जहां लोगों के आशियाने और पशुओं को निगल लिया, वहीं अब इंसानी लालच इस घाव को और गहरा कर रहा है। ताजा मामला बेला ठाकरा क्षेत्र का है, जहाँ पोंग बांध से छोड़े गए पानी के प्रकोप से बचने के लिए ग्रामीणों ने दिन-रात एक कर जिस ‘तुस्सी’ (कच्चे तटबंध) का निर्माण किया था, अब उसे ही तोड़कर अवैध खनन के लिए रास्ता बना दिया गया है।

मेहनत पर फिरा पानी, माफिया बेखौफ
गौरतलब है कि साल 2025 में जब बाढ़ का सैलाब अपने चरम पर था, तब बेला ठाकरा के निवासियों ने प्रशासन के साथ मिलकर जान-जोखिम में डालकर तुस्सी बनाई थी। इस तटबंध के कारण पानी दो भागों में विभाजित हो गया था, जिससे कई घरों और खेतों को नुकसान होने से बचा लिया गया। लेकिन आज माफियाओं ने उसी सुरक्षा कवच को तोड़ दिया है।

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि जिस स्थान पर लोगों ने पसीना बहाया था, वहां अब धड़ल्ले से जेसीबी और टिप्पर चल रहे हैं। खनन माफिया ने न केवल तटबंध को क्षति पहुंचाई है, बल्कि नदी के बीचों-बीच पुलियां डालकर अवैध रास्ते भी बना लिए हैं।

हिमाचल का माल पंजाब में खपाने की तैयारी
यह अवैध खनन रात के अंधेरे में ही नहीं बल्कि दिन के उजाले में भी बेखौफ जारी है। माफिया द्वारा निकाला गया माल हिमाचल की सीमा से पार पंजाब ले जाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी मौन साधे हुए है।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल
क्षेत्रीय जनता अब प्रशासन से कड़े सवाल पूछ रही है:
- जिस तुस्सी को बनाने के लिए एसडीएम और विधायक खुद मौके पर आए थे, उसे तोड़े जाने पर अधिकारी चुप क्यों हैं?
- क्या यह सब मिलीभगत का परिणाम है?
- भारी मशीनों के शोर के बावजूद पुलिस और विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई गई और सुरक्षा तटबंध को ठीक नहीं किया गया, तो अगली बारिश में पूरा इलाका फिर से जलमग्न हो सकता है।








