आदर्श वृद्धाश्रम ने बेसहारा बुजुर्ग माता को दिया सहारा, अपनों ने ठुकराया

पठानकोट (झालोखड़ी): समाज में रिश्तों के गिरते स्तर और बुजुर्गों की अनदेखी का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। स्थानीय आदर्श वृद्धाश्रम (बुजुर्गों का वेहड़ा), झाखोलाड़ी ने 25 दिसंबर को एक और बेसहारा बुजुर्ग माता को अपनाकर मानवता की मिसाल पेश की है।
संपन्न परिवार के बावजूद दर-दर भटकने को मजबूर
वृद्धाश्रम में शरण लेने वाली 78 वर्षीय माता ब्रह्मो देवी (पत्नी श्री बुआ दत्ता), निवासी धलोरिया की कहानी सुनकर हर किसी की आँखें नम हो गईं। माता ने बताया कि उनके पांच बच्चे हैं, जिनमें तीन बेटे और दो बेटियां हैं। विडंबना यह है कि उनके दो बेटे रेलवे से सेवानिवृत्त (रिटायर) हैं और पोते कनाडा में रह रहे हैं। परिवार आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद माता को दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज कर दिया गया।

पेंशन छीन लेते हैं बेटे और बहुएं
माता ब्रह्मो देवी ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि उनके तीनों बेटे और बहुएं न केवल उन्हें खाना देने से मना करते हैं, बल्कि उनके साथ मारपीट भी करते हैं। हद तो तब हो गई जब उन्होंने बताया कि उनके बेटे उनकी पेंशन के पैसे भी छीन लेते हैं और बीमारी की हालत में दवा के लिए एक रुपया तक नहीं देते। पिछले कुछ समय से वह पड़ोसियों के घरों में रातें काट रही थीं और मांगकर खाना खाने को मजबूर थीं।

वृद्धाश्रम बना अब नया घर
बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य के कारण माता अब अपना खाना बनाने और खुद का ख्याल रखने में असमर्थ थीं। उनकी मार्मिक स्थिति को देखते हुए सुपरिटेंडेंट मैडम अंजलि शर्मा ने उन्हें तुरंत आश्रम में रहने की अनुमति दी।
इस अवसर पर उपस्थित रहे:
आश्रम के प्रधान सतनाम सिंह, सुपरिटेंडेंट अंजलि शर्मा, और स्टाफ सदस्य सविता, विजय कुमारी, सुरजीत कौर, आशा रानी, जसवीर कौर, विपिन कुमार, रमेश चंद्र और आसी देवी विशेष रूप से मौजूद थे। आश्रम प्रबंधन ने संकल्प लिया कि माता की उचित देखभाल और चिकित्सा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।








