पुलिस कार्रवाई न होने से हताश होकर शिक्षिका ने लगाया मौत को गले

पटियाला | थाना सदर के गांव शेखुपुरा कंबोआ में एक 31 वर्षीय निजी स्कूल शिक्षिका गुरजीत कौर द्वारा आत्महत्या का मामला सामने आया है। मृतका के पास से मिले सुसाइड नोट ने पुलिस और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरजीत ने अपने आखिरी शब्दों में लिखा— “आज थक गई सबके साथ अच्छा करते-करते, हिस्से में धोखा, फ्रॉड और झूठ ही आया… अब लड़ने की हिम्मत नहीं रही।”
7 महीने से न्याय के लिए भटक रही थी बेटी
परिजनों का आरोप है कि गुरजीत पिछले सात महीनों से ससुराल पक्ष की प्रताड़ना के खिलाफ न्याय की गुहार लगा रही थी। पिता बलविंदर सिंह ने बताया कि शिकायत के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को 5-6 बार थाने बुलाया, लेकिन मामला सुलझाने या ठोस कार्रवाई करने के बजाय केवल काउंसलिंग का हवाला दिया जाता रहा। इसी देरी और मानसिक दबाव ने गुरजीत को अंदर से तोड़ दिया।

पति समेत 6 लोगों पर केस दर्ज
पुलिस ने सुसाइड नोट और पिता के बयानों के आधार पर मृतका के पति सहित कुल 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों में पति के दो दोस्त भी शामिल हैं, जो शिक्षिका को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे।
मुख्य बिंदु:
तारीख: बुधवार को शिक्षिका ने की खुदकुशी।
आरोपी: पति, ससुराल पक्ष और पति के दो दोस्त (कुल 6 नामजद)।
वजह: ससुराल पक्ष की प्रताड़ना और पुलिसिया कार्रवाई में देरी से उपजी हताशा।
”ऐसे संवेदनशील मामलों में पहले काउंसलिंग का नियम है। जांच के बाद ही कानूनी कार्रवाई की जाती है। हम मामले की गहन जांच कर रहे हैं।”
— सरप्रीत कौर, इंचार्ज, महिला थाना पटियाला

उठते सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह कड़वा सच उजागर किया है कि क्या “काउंसलिंग” के नाम पर मामलों को लटकाना ही पुलिस की नियति बन गई है? अगर सात महीने पहले दी गई शिकायत पर समय रहते सख्त रुख अपनाया जाता, तो शायद एक होनहार शिक्षिका आज हमारे बीच होती।








