चक्की पुल हादसे से भी नहीं मिली सीख, चक्की खड्ड में अवैध माइनिंग आज भी उसी रफ़्तार से जारी

पठानकोट/कंडवाल : पठानकोट और हिमाचल को जोड़ने वाली चक्की नदी पर बना रेलवे पुल दो वर्ष पहले तेज़ बहाव और कटान का सामना न कर सका और क्षतिग्रस्त हो गया। अढ़ाई वर्ष बीत जाने के बाद भी यह पुल पूरी तरह बहाल नहीं हो पाया है, जिसके कारण स्थानीय लोगों, यात्रियों और व्यापार से जुड़े वर्ग को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल को नुकसान पहुँचने की मुख्य वजह, नदी क्षेत्र में लंबे समय से चल रही अवैध माइनिंग रही। उनका आरोप है कि लगातार निकाले गए आरबीएम व पत्थरों ने नदी के बहाव को बदल दिया, जिससे पुलों की नींव कमजोर हो गई।


इसी बीच, चक्की नदी व कंडवाल खड्ड क्षेत्र में आज भी कई स्थानों पर मशीनों द्वारा दिन के समय माइनिंग किए जाने की तस्वीरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि कुछ ट्रकों पर नंबर प्लेट तक नहीं होती, जिससे उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है।


हाल ही में नूरपुर के एसपी श्री कुलभूषण वर्मा ने पत्रकार वार्ता में कहा था कि अवैध माइनिंग व नशे के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी। जब ACCURATE MIRROR/AMI NEWS ने कंडवाल क्षेत्र में हो रही माइनिंग की जानकारी उनसे साझा की, तो उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा हाल ही में रात के समय दबिश दी गई थी, लेकिन कोई मशीन नहीं मिली। उन्होंने आश्वासन दिया कि पुलिस आगे भी कार्रवाई जारी रखेगी और इस संबंध में पठानकोट पुलिस के साथ निरंतर संपर्क में है।

उधर, क्षेत्र में सक्रिय क्रशर यूनिटों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हरियाल इलाके में क्रशर पिछले कुछ वर्षों से लगातार चल रहे हैं, जबकि यहाँ वैध खनन स्रोत बहुत सीमित बताए जाते हैं। इससे यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि हिमाचल का खनिज बिना रॉयल्टी पंजाब पहुँच रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि दोनों राज्यों के राजस्व को भी हानि पहुँचती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बिना नियंत्रित खनन से नदी का प्राकृतिक बहाव बदल जाता है, जिससे पुलों और तटीय क्षेत्रों पर लगातार दबाव बढ़ता है। यदि समय रहते सख़्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में बड़ा हादसा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस पूरे मामले में स्थानीय लोग माइनिंग विभाग, प्रशासन और पुलिस से अपेक्षा कर रहे हैं कि अवैध खनन पर रोक लगाते हुए दोषियों के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाए, ताकि न केवल पर्यावरण की रक्षा हो सके, बल्कि लोगों की जान-माल भी सुरक्षित रह सके।







