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मीरथल के ब्यास दरिया में सरेआम माइनिंग का खेल: प्रशासन की नाक के नीचे चल रहीं भारी मशीनें

मीरथल के ब्यास दरिया में सरेआम माइनिंग का खेल: प्रशासन की नाक के नीचे चल रहीं भारी मशीनें

​पठानकोट/मीरथल: पंजाब में अवैध माइनिंग (Illegal Mining) का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। ताज़ा मामला मीरथल का है, जहाँ ब्यास दरिया के बीचों-बीच भारी मशीनें लगाकर रेत निकालने का काम धड़ल्ले से जारी है। हैरत की बात यह है कि जहाँ यह सारा खेल चल रहा है, उससे महज़ कुछ ही दूरी पर पुलिस चौकी स्थित है, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।

खेत की आड़ में दरिया का सीना छलनी

​रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की ‘जिसका खेत, उसकी रेत’ योजना की आड़ लेकर अवैध खनन माफिया सक्रिय हो गया है। हालांकि, दरिया के भीतर किसी भी प्रकार की खेती की गुंजाइश नहीं है, फिर भी बड़ी-बड़ी मशीनों के ज़रिए दरिया का सीना छलनी किया जा रहा है। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिन-रात बिना किसी खौफ के इस काम को अंजाम दे रहे हैं।

​रणनीतिक पुलों पर मंडराया खतरा

​खनन वाली जगह के बिल्कुल पास दो महत्वपूर्ण पुल स्थित हैं:

​राष्ट्रीय राजमार्ग का पुल: यह पुल पूरे भारत को जम्मू-कश्मीर से जोड़ता है। सामरिक और यातायात की दृष्टि से यह पुल बेहद संवेदनशील है।

​रेलवे पुल: दरिया के भीतर हो रही लगातार खुदाई से इन पुलों की नींव को भारी नुकसान पहुँचने की आशंका जताई जा रही है। अगर जल्द ही इस अवैध माइनिंग पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में यहाँ किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

​प्रशासन और विभाग की चुप्पी पर सवाल

​स्थानीय लोगों और एएमआई न्यूज़ (AMI News) की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस प्रशासन और माइनिंग विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

​खनन स्थल के पास 24 घंटे पुलिस की मौजूदगी होने के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

​क्या विभाग और माफियाओं के बीच कोई मिलीभगत है?

​ब्यास दरिया के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को हो रहे नुकसान का जिम्मेदार कौन है?

​”यह पुल भारत और जम्मू-कश्मीर के बीच की जीवनरेखा है। अवैध खनन के कारण इन पुलों का ढांचा कमज़ोर हो रहा है, जो सुरक्षा के नज़रिए से एक बड़ी चिंता है।”

​निष्कर्ष

​अवैध माइनिंग के कारण न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि पंजाब की प्राकृतिक संपदा और बुनियादी ढांचे को भी खतरा पैदा हो गया है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद, स्थानीय प्रशासन इस गुंडागर्दी को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।

Ami News
Author: Ami News

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