ट्रम्प का नया दांव: ‘गोल्ड कार्ड’ वीज़ा, सिर्फ़ ‘टैलेंटेड और अमीर’ लोगों को मिलेगा अमेरिका में रहने का अधिकार

वाशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को एक नई और महत्वाकांक्षी वीज़ा पहल, ‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’ के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है। यह कदम ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसका उद्देश्य टॉप टैलेंट (विशेषकर भारत और चीन जैसे देशों से) को रोकना और वैश्विक कंपनियों को अमेरिका लाना है।
मुख्य बातें:
किसे मिलेगा गोल्ड कार्ड? राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका अब सिर्फ़ ‘टैलेंटेड’ लोगों को ही वीज़ा देगा, न कि ऐसे लोगों को जो अमेरिकी नागरिकों की नौकरियाँ छीन सकते हैं।

अनलिमिटेड रेसिडेंसी (हमेशा रहने का अधिकार): ‘गोल्ड कार्ड’ धारकों को अमेरिका में अनलिमिटेड रेसिडेंसी का अधिकार मिलेगा। यह प्रक्रिया ग्रीन कार्ड के माध्यम से स्थायी निवास पाने के समान होगी। नागरिकता के अधिकार (पासपोर्ट और वोट देने का अधिकार) को छोड़कर, कार्ड धारकों को बाकी सारी सुविधाएँ एक अमेरिकी नागरिक जैसी मिलेंगी।
लागत और उपयोग:
कीमत: व्यक्तिगत आवेदकों के लिए कार्ड की कीमत 1 मिलियन डॉलर (लगभग ₹8.97 करोड़) होगी। हालाँकि, कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए यह कार्ड लेने पर 2 मिलियन डॉलर चुकाने होंगे।
पहले फरवरी में इसकी कीमत 5 मिलियन डॉलर तय की गई थी, जिसे सितंबर में घटाकर 1 मिलियन डॉलर कर दिया गया।
फंड का इस्तेमाल: ट्रम्प ने कहा कि इस रकम का इस्तेमाल टैक्स घटाने और सरकारी कर्ज चुकाने में किया जाएगा।

EB-1 और EB-2 वीज़ा की जगह लेगा:
कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक के मुताबिक, यह गोल्ड कार्ड मौजूदा EB-1 और EB-2 वीज़ा श्रेणियों की जगह लेगा, जो बंद हो सकती हैं।
EB-1 ग्रीन कार्ड उन लोगों के लिए है जो असाधारण क्षमता (extraordinary ability) रखते हैं।
EB-2 वीज़ा उच्च शिक्षा (मास्टर्स या उससे ऊपर) की योग्यता रखने वाले लोगों के लिए है।
अन्य वीज़ा कार्ड भी होंगे लॉन्च:
ट्रम्प ने ‘गोल्ड कार्ड’ के अलावा ‘ट्रम्प प्लैटिनम कार्ड’ और ‘कॉर्पोरेट गोल्ड कार्ड’ समेत तीन नए वीज़ा कार्ड भी लॉन्च किए हैं। ‘ट्रम्प प्लैटिनम कार्ड’ भी जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है।








