सर्दियों में बच्चों को अपनी मर्जी से दवा देना हो सकता है खतरनाक

पठानकोट | अमनदीप ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, पठानकोट ने बाल चिकित्सा (Pediatrics) के क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं के साथ एक नया आयाम स्थापित किया है। अस्पताल में नवजात शिशुओं से लेकर 18 वर्ष तक के किशोरों के लिए सभी प्रकार की मॉडर्न फैसिलिटीज एक ही छत के नीचे उपलब्ध करवाई गई हैं।

अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अश्विनी सामी ने जानकारी देते हुए बताया कि वे अमनदीप ग्रुप से जुड़कर बेहद उत्साहित हैं क्योंकि यहाँ ‘पेशेंट सेंट्रिक’ (मरीज को केंद्र में रखकर) इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में छोटे बच्चों के लिए वेंटिलेटर, सी-पैप (CPAP), सरफेक्टेंट थेरेपी और ईको (Echo) जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जो पठानकोट के किसी अन्य अस्पताल में एक साथ उपलब्ध नहीं हैं।

मल्टी-स्पेशलिटी टीम का लाभ:
डॉक्टर ने बताया कि यहाँ सिर्फ बाल रोग विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि कार्डियोलॉजिस्ट, सर्जन और ऑर्थोपेडिशियन की पूरी टीम एक साथ काम करती है। इससे मरीज को ‘टोटल केयर अप्रोच’ मिलती है, जो गंभीर मामलों में जीवन रक्षक साबित होती है।
सर्दियों में बच्चों की देखभाल के लिए खास सलाह:
बदलते मौसम और सर्दियों में बच्चों में बढ़ते वायरल इन्फेक्शन और अस्थमा के खतरे पर बात करते हुए डॉक्टर ने अभिभावकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी:
कपड़ों की लेयरिंग: बच्चों को बड़ों के मुकाबले कपड़ों की कम से कम एक परत (Layer) ज्यादा पहनाएं।
सिर ढककर रखें: सुबह और शाम के समय बच्चों को टोपी जरूर पहनाएं ताकि ठंड से बचाव हो सके।
खेलते समय सावधानी: बच्चे अक्सर खेलते वक्त कपड़े उतार देते हैं, जिससे वे बीमार पड़ सकते हैं, इसलिए उन पर नजर रखें।

बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न दें:
डॉक्टर ने अभिभावकों को सख्त हिदायत दी है कि बच्चे के बीमार पड़ने पर खुद “केमिस्ट” न बनें। उन्होंने कहा, “सर्दी-जुकाम अक्सर वायरल होता है, जिसमें एंटीबायोटिक्स की जरूरत नहीं होती। बिना वजह एंटीबायोटिक्स देने से बच्चे के पेट का ‘नेचुरल फ्लोरा’ (अच्छे बैक्टीरिया) खराब हो जाता है।” उन्होंने सलाह दी कि बीमारी के लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें ताकि निमोनिया या ब्रोंकियोलाइटिस जैसी गंभीर स्थितियों से बचा जा सके।








