पंजाब भाजपा कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा का बड़ा ब्यान ,
भाजपा 117 सीटों पर अकेले लड़ेगी चुनाव

चंडीगढ़: पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संभावित गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों पर पंजाब भाजपा ने विराम लगा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के उस बयान को, जिसमें उन्होंने पंजाब में शिअद के साथ गठबंधन को ‘जरूरी’ बताया था, भाजपा ने खारिज कर दिया है।
कैप्टन की राय निजी, 117 सीटों पर फोकस: अश्वनी शर्मा
पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी पहले दिन से ही राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। शर्मा ने कहा, “कैप्टन साहब वरिष्ठ हैं और उन्होंने अपनी निजी राय व्यक्त की है। पार्टी पहले दिन से स्पष्ट है, 117 सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यह अपने संगठनात्मक ढांचे की योजना बना रही है और विस्तार कर रही है। पार्टी इन 117 सीटों पर संगठनात्मक और आंदोलन-आधारित ढंग से काम कर रही है।”
हरसिमरत बादल के बयान पर पलटवार
जब शर्मा से अकाली दल की नेता हरसिमरत बादल के उस बयान के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा 2032 में भी अपने दम पर सरकार नहीं बना पाएगी, तो उन्होंने तीखा पलटवार किया। शर्मा ने जवाब दिया, “वह हमारी बड़ी बहन हैं। वह कब से राजनेता के बजाय ज्योतिषी बन गई हैं?”

उन्होंने आगे कहा, “राजनीति में क्या होगा? कौन जीतेगा? आज सत्ता में बैठे लोगों ने कभी इसकी उम्मीद नहीं की थी। इसलिए, राजनीति में कुछ भी हो सकता है। जनता यह फैसला करती है कि किसे ताज पहनाया जाएगा। देश के बाकी हिस्सों की तरह पंजाब भी भाजपा को चाहता है।”
क्या था कैप्टन अमरिंदर सिंह का दावा?
दरअसल, कुछ दिन पहले एक पॉडकास्ट में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दावा किया था कि भाजपा पंजाब में अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती। उन्होंने कहा था कि अगर भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव जीतना चाहती है, तो उसे अकाली दल के साथ गठबंधन करना होगा, ‘कोई और रास्ता नहीं है।’

कैप्टन ने तर्क दिया था कि राज्य के जटिल राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने के लिए स्थानीय गठबंधनों की आवश्यकता है। उन्होंने इसका मुख्य कारण यह बताया कि भाजपा का पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में आधार नहीं है, जबकि अकाली दल का है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने अनुभव के आधार पर जोर देकर कहा था, “अगर भाजपा अकाली दल के साथ गठबंधन नहीं करती है, तो सरकार बनाने के लिए 2027 और 2032 को भूल जाइए।”








