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बिजली निजीकरण का विरोध

सरकार बिजली विभाग को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी में, ठेका मुलाज़िम मोर्चा का ऐलान, ‘बिजली संशोधन बिल 2025’ रद्द न हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन

भोआ। ठेका मुलाज़िम संघर्ष मोर्चा पंजाब ने केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ़ बड़े बीओटी (BOT) प्रोजेक्ट के तहत निजीकरण की नीतियों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। इस संघर्ष का मुख्य कारण बिजली संशोधन बिल 2025 का ड्राफ्ट तैयार होना है, जिसके तहत सरकार बिजली विभाग को पूरी तरह निजी हाथों में सौंपने की प्रारंभिक तैयारी कर रही है।

मोर्चे का आरोप है कि केंद्र और पंजाब सरकार दोनों ही पूंजीपतियों का पोषण करने में लगी हुई हैं, जबकि पंजाब के आम लोगों, किसानों, मज़दूरों और बिजली कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की जा रही है। मोर्चे का कहना है कि बिजली हर इंसान की मूलभूत ज़रूरत है, लेकिन बिजली को अब आम आदमी की पहुँच से दूर किया जा रहा है। सरकार देश भर में बिजली के वितरण और ग्रिड प्रबंधन को पूंजीपतियों के हाथों में सौंपना चाहती है, जिससे बिजली पूरी तरह से निजीकरण की जाएगी।

मांगें और आंदोलन:

  • ​मोर्चा सरकार की इस नीति के खिलाफ संघर्ष कर रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वह गाँवों और शहरों में प्रीपेड मीटर लगाने की तैयारी का कड़ा विरोध करते हैं।
  • ​उनका कहना है कि प्रीपेड मीटर के अनुसार बिजली उपभोक्ताओं को महँगी बिजली मिलेगी और गरीबों के लिए बिजली का उपयोग करना असंभव हो जाएगा।
  • ​मोर्चा केंद्र सरकार से 4 अन्य संहिताओं को लागू करने, श्रमिकों पर अत्याचार करने और कर्मचारियों को ठेके पर डालने वाले इस ड्राफ्ट नीति 2025 को तुरंत रद्द करने की मांग कर रहा है।
  • ​ठेका मुलाज़िम संघर्ष मोर्चा ने कर्मचारियों के साथ मिलकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए यह बिल वापस लेने तक आंदोलन जारी रखने का प्रण लिया है।

उपस्थित सदस्य: इस दौरान मोर्चे के संदीप कुमार, चेयरमैन रविंदर सिंह, कुलदीप कुमार, कान्हो जी, परमजीत कुमार, हरकेश कुमार, जसवीर और आदि मौजूद रहे।

Ami News
Author: Ami News

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